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टेऊसा में स्मैक का जहर: नशे की गिरफ्त में फंस रही युवा पीढ़ी

नरसिंह डागा फार्म हाउस बना नशेड़ियों का अड्डा, ग्रामीणों में दहशत, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।
किशनगंज के टेऊसा पंचायत में स्मैक का बढ़ता प्रचलन समाज के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। गांव और आसपास के क्षेत्रों में नशे का जाल इस कदर फैल रहा है कि युवा पीढ़ी तेजी से इसकी चपेट में आती दिखाई दे रही है। स्मैक का यह जहर न केवल युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रहा है, बल्कि परिवारों की खुशियां और समाज की शांति भी छीन रहा है।


ग्रामीणों के अनुसार टेऊसा पंचायत स्थित नरसिंह डागा फार्म हाउस और आसपास के इलाकों में नशेड़ियों का जमावड़ा आम बात हो गई है। सुबह से देर रात तक संदिग्ध गतिविधियां देखी जाती हैं। इससे क्षेत्र का माहौल लगातार खराब होता जा रहा है और आम लोगों में भय का वातावरण बना हुआ है।


युवाओं का भविष्य अंधकार में
ग्रामीणों का कहना है कि कई युवक स्मैक की लत का शिकार हो चुके हैं। नशे की लत ने अनेक परिवारों को आर्थिक संकट, मानसिक तनाव और सामाजिक परेशानियों में धकेल दिया है। अभिभावकों की चिंता बढ़ती जा रही है क्योंकि जिस उम्र में युवाओं को शिक्षा, रोजगार और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ना चाहिए, उस उम्र में वे नशे की गिरफ्त में फंसते जा रहे हैं।


समाज को खोखला कर रहा है नशा
स्मैक जैसे घातक नशीले पदार्थ केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करते हैं। नशे की लत अपराध, हिंसा, पारिवारिक कलह और सामाजिक विघटन को जन्म देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मैक का लगातार सेवन युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है तथा उन्हें धीरे-धीरे विनाश की ओर ले जाता है।


महिलाओं और बच्चों में बढ़ी चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों की बढ़ती गतिविधियों से महिलाओं और बच्चों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। शाम ढलते ही कई स्थानों पर संदिग्ध लोगों का जमावड़ा लगने से स्थानीय लोग खुद को असहज और असुरक्षित महसूस करते हैं।


प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर स्मैक और अन्य मादक पदार्थों के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि नशे के अड्डों की पहचान कर वहां नियमित निगरानी, छापेमारी और कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि युवाओं को इस दलदल में जाने से बचाया जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निर्णायक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं तथा एक पूरी पीढ़ी नशे की भेंट चढ़ सकती है।


स्मैक कोई नशा नहीं, बल्कि समाज को भीतर से खोखला करने वाला धीमा जहर है। यह युवाओं के सपनों, परिवारों की खुशियों और क्षेत्र के भविष्य को निगल रहा है। टेऊसा सहित पूरे इलाके को इस अभिशाप से मुक्त करने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई और सामाजिक जागरूकता दोनों की आवश्यकता है।

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