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15 जनवरी को मनाई जाएगी मकर संक्रांति

भगवान शिव जी की आराधना व तिल के तेल का दीपक जलाने से आयु ,आरोग्यता व धन धान्य की होगी वृध्दि

समाज जागरण रंजीत तिवारी
रामेश्वर वाराणसी।।
वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को पड़ेगी, लेकिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश रात 9:39 बजे होने के कारण इसका पुण्यकाल 15 जनवरी 2026 की भोर से माना जाएगा। इसी कारण स्नान-दान, जप-तप और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व 15 जनवरी को रहेगा। सूर्य के राशि परिवर्तन से जुड़ा प्रकृति का महापर्व मकर संक्रांति इस वर्ष 15 जनवरी, गुरुवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। मकर संक्रांति पर तीन शुभ योगों की युति होने से स्नान-दान का विशेष लाभ मिलेगा।
मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होते हैं। सूर्य के उत्तरायण होते ही दिन बड़े होने लगते हैं, प्रकाश की अवधि बढ़ती है और शीत ऋतु का प्रभाव क्रमशः कम होने लगता है। भारतीय सनातन संस्कृति में इसे प्रकृति परिवर्तन के पर्व के रूप में मनाने की परंपरा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति खरमास की समाप्ति और शुभ कार्यों के आरंभ का प्रतीक है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे सूर्य का उत्तरायण कहा जाता है। उत्तरायण काल को आध्यात्मिक उन्नति, दान-पुण्य और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. शीतला प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति पर तीन शुभ योगों की युति बन रही है, जिससे पर्व का पुण्यफल कई गुना बढ़ गया है। संयोगवश इसी दिन माघ मास की तिल द्वादशी भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ कृष्ण द्वादशी को भगवान विष्णु के शरीर से तिल की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए इस दिन तिल का दान और तिल का सेवन अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इसके साथ ही पर्व के दिन वृद्धि योग का संयोग भी बन रहा है।
ज्योतिष शास्त्रों में वृद्धि योग को शुभ कार्यों, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष फलदायी बताया गया है। माघ मास में मकर संक्रांति का पड़ना स्वयं में शुभ माना जाता है और वृद्धि योग के कारण इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है।

काशी में गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व

उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति को ‘दान का पर्व’ कहा जाता है। काशी में इस दिन गंगा स्नान के साथ-साथ तिल, गुड़, खिचड़ी, अन्न, वस्त्र और गर्म कपड़ों का दान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है, जिसका फल कभी समाप्त नहीं होता। इसी के साथ काशी में माघ मेले की शुरुआत भी मकर संक्रांति से मानी जाती है, जिससे घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

दान-पुण्य का पुण्यकाल

धार्मिक पंचांग के अनुसार, 15 जनवरी 2026 को भोर से दोपहर तक का समय मकर संक्रांति का विशेष पुण्यकाल रहेगा। इस अवधि में गंगा या किसी भी नदी, सरोवर, कुंड अथवा तालाब में मौन रहकर स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। इसके बाद ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान करने से कई गुना फल मिलता है। मकर संक्रांति पर गंगा माता का स्मरण, पूर्वजों का तर्पण, तिल और गर्म चीजों का सेवन तथा दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। काशी में यह पर्व न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन सच्चे मन से किया गया स्नान-दान जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।

क्या दान करें

तिल और गुड़, दाल-चावल की खिचड़ी, अन्न, गर्म वस्त्र, गोदान व अन्य आवश्यक वस्तुएं।

15 जनवरी को ही मनाया जाएगा पर्व
श्री त्रिपाठी ने बताया कि पारंपरिक सूर्य सिद्धांत आधारित गणना के अनुसार 14 जनवरी, बुधवार की रात 9:39 बजे सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। चूंकि संक्रांति की घटना अत्यंत सूक्ष्म क्षण में होती है, इसलिए शास्त्रों में उसी समय पर्व मनाने का विधान नहीं है। धर्मशास्त्रों के अनुसार जब मकर संक्रांति रात्रि में होती है, तब उसका पुण्यकाल संक्रांति के समय से 16 घंटे आगे तक माना जाता है। इसी आधार पर इस वर्ष 15 जनवरी को मकर संक्रांति पर्व मनाया जाएगा।
स्नान-दान का पुण्यकाल
पर्व के दिन सूर्योदय से लेकर दोपहर 1:39 बजे तक स्नान-दान का विशेष पुण्यकाल रहेगा। इस अवधि में पवित्र नदियों में स्नान, तिल, कंबल, घृत, अन्न आदि का दान तथा तिलयुक्त खिचड़ी का सेवन अत्यंत शुभ माना गया है।
आस्था और परंपरा का पर्व
मकर संक्रांति केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति, कृषि और सामाजिक समरसता का पर्व है। तिल-गुड़, खिचड़ी, दान और स्नान के माध्यम से यह पर्व त्याग, सेवा और शुभ संकल्प का संदेश देता है। इस वर्ष शुभ योगों के कारण मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।


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