*नोएडा।** सेक्टर-39 स्थित जिला संयुक्त चिकित्सालय एक बार फिर विवादों में है। सेक्टर-51 नोएडा के महासचिव एवं डीडीआरडब्ल्यूए फेडरेशन गौतमबुद्ध नगर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष **संजीव कुमार** ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से मामले की निष्पक्ष जांच एवं कार्रवाई की मांग की है।
संजीव कुमार के अनुसार, **9 जुलाई 2026 की रात लगभग 10 बजे** वह अपनी घरेलू सहायिका (मेड) की बेटी को भर्ती कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने अस्पताल की इमरजेंसी में एक सड़क दुर्घटना में घायल महिला और उसके परिजनों की परेशानी देखी।
### **45 मिनट तक डॉक्टर के इंतजार का आरोप**
शिकायतकर्ता का आरोप है कि दुर्घटना में घायल महिला करीब 45 मिनट तक इमरजेंसी और ड्रेसिंग रूम में मौजूद रही, लेकिन डॉक्टर ने स्वयं आकर उसका परीक्षण नहीं किया। उनका कहना है कि केवल ड्रेसिंग कर मरीज को दवा और जांच लिखी जा रही थी, जबकि दुर्घटना के बाद शरीर में गंभीर चोट या अन्य आपात स्थिति की जांच आवश्यक थी।
आरोप है कि इलाज में देरी से नाराज परिजन और अस्पताल कर्मियों के बीच बहस भी हुई, जिसके बाद परिजन मरीज को बिना उपचार कराए ही दूसरे अस्पताल ले जाने को मजबूर हो गए।
### **डॉक्टरों और स्टाफ के व्यवहार पर सवाल**
संजीव कुमार का आरोप है कि इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर मरीजों का प्रत्यक्ष परीक्षण करने के बजाय दूर बैठकर दवाइयां और जांच लिख रहे थे तथा अधिकांश कार्य नर्सिंग और अन्य स्टाफ के भरोसे छोड़ दिया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल के कुछ कर्मचारियों का व्यवहार मरीजों और उनके परिजनों के प्रति असहयोगपूर्ण एवं अनुचित था।
### **सिफारिश के बाद भर्ती होने का दावा**
संजीव कुमार ने बताया कि उनकी घरेलू सहायिका की बेटी को भी तत्काल भर्ती नहीं किया जा रहा था। उनके अनुसार, पूर्व सीएमएस **डॉ. अजय अग्रवाल** तथा डीडीआरडब्ल्यूए फेडरेशन के अध्यक्ष **एन.पी. सिंह** के हस्तक्षेप और फोन करने के बाद ही बच्ची को अस्पताल में भर्ती किया गया।
उन्होंने दावा किया कि प्रारंभिक जांच के दौरान मरीज का रक्तचाप (बीपी) तक नहीं मापा गया और आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण भी समय पर नहीं किए गए।
### **परिजनों ने लगाया बदसलूकी का आरोप**
शिकायतकर्ता के अनुसार, भर्ती के अगले दिन भी अस्पताल की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उनका कहना है कि मरीज की मां ने फोन कर आरोप लगाया कि डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का व्यवहार गरीब मरीजों के प्रति ठीक नहीं है और वह भय के कारण बच्ची को गांव ले जाकर इलाज कराने की बात कह रही है।
### **सफाई व्यवस्था और सुरक्षा पर भी उठे सवाल**
संजीव कुमार ने अस्पताल की साफ-सफाई पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार अस्पताल के वार्डों में गंदी चादरें, जगह-जगह गंदगी, दुर्गंध तथा दूसरे तल के कॉरिडोर में कैंटीन और लैब के सामने देर रात तक आवारा कुत्तों की मौजूदगी देखने को मिली। उन्होंने इन व्यवस्थाओं को मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बताया।


### **मुख्यमंत्री, डीएम और सीएमओ से कार्रवाई की मांग**
संजीव कुमार ने मुख्यमंत्री **योगी आदित्यनाथ**, जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था में सुधार करने तथा यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सरकारी अस्पतालों में सम्मानजनक व्यवहार और समय पर उपचार मिलना चाहिए। यदि मरीजों को इलाज के लिए सिफारिश का सहारा लेना पड़े तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
### **अस्पताल प्रशासन का पक्ष**
इस संबंध में जिला अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। यदि शिकायतों की जांच होती है तो उसके निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी।
(नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है।
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