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नोएडा स्टेडियम में आवारा कुत्तों का हमला, वरिष्ठ पत्रकार अरुण सिन्हा गंभीर रूप से घायल

नोएडा। नोएडा स्टेडियम में शनिवार को टहलने गए वरिष्ठ पत्रकार और चेतना मंच से जुड़े अरुण सिन्हा पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। हमले में उनके पैर को कुत्तों ने बुरी तरह काट लिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए और पैर से काफी खून बहने लगा।

बताया गया कि अरुण सिन्हा शनिवार को रोजाना की तरह नोएडा स्टेडियम में टहलने गए थे। इसी दौरान चार-पांच कुत्तों ने अचानक उन पर हमला कर दिया। एक कुत्ते ने उनके पैर को बुरी तरह काट लिया। हमले के बाद वह लहूलुहान हो गए।

घटना की जानकारी मिलने पर कुछ पत्रकार साथी उन्हें तत्काल सरकारी अस्पताल सेक्टर-39 लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद बताया कि केवल एंटी-रेबीज इंजेक्शन पर्याप्त नहीं होगा और उन्हें रेबीज सीरम लगाए जाने की आवश्यकता है। अस्पताल में उस समय सीरम उपलब्ध नहीं होने पर अस्पताल प्रशासन से अनुरोध किया गया, जिसके बाद सीरम मंगवाया गया और अरुण सिन्हा को सीरम के इंजेक्शन लगाए गए।

परिजनों और करीबियों के अनुसार, हमले के बाद अरुण सिन्हा को काफी दर्द और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वह घर पर आराम कर रहे हैं। बताया गया कि पैर को जमीन पर रखते ही खून निकलने लगता है और उन्हें बाथरूम जाने तक में परेशानी हो रही है।

स्टेडियम में कुत्तों को लेकर उठे गंभीर सवाल

इस घटना के बाद नोएडा स्टेडियम में आवारा कुत्तों की मौजूदगी और उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और पत्रकारों का कहना है कि अलग-अलग स्थानों से कुत्तों को लाकर स्टेडियम परिसर में छोड़ने और उन्हें वहां खाना खिलाने की वजह से उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।

सवाल यह है कि नोएडा स्टेडियम आखिर किसके लिए है?

क्या यह लोगों के टहलने, व्यायाम करने और स्वास्थ्य के लिए बनाया गया स्थान है या फिर यहां आवारा कुत्तों को रखने और खिलाने की जगह बनती जा रही है?

अगर एक वरिष्ठ पत्रकार पर चार-पांच कुत्ते हमला कर सकते हैं और उन्हें गंभीर रूप से घायल कर सकते हैं, तो कल्पना कीजिए कि इसी तरह का हमला किसी छोटे बच्चे, महिला या बुजुर्ग पर हो जाए तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।

प्राधिकरण की जिम्मेदारी पर सवाल

घटना ने नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित व्यवस्था की जिम्मेदारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि स्टेडियम परिसर में घूमने वाले लोगों को आक्रामक कुत्तों से सुरक्षित रखने के लिए क्या प्रभावी व्यवस्था की गई है?

कुत्तों के प्रति संवेदनशीलता अपनी जगह है, लेकिन मनुष्यों की सुरक्षा से समझौता भी नहीं किया जा सकता।

नोएडा स्टेडियम में हुई इस घटना के बाद अब जरूरत है कि प्राधिकरण पूरे मामले का संज्ञान ले, परिसर में कुत्तों की स्थिति का आकलन करे और ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करे जिससे पशुओं के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखते हुए स्टेडियम में आने वाले लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

वरिष्ठ पत्रकार अरुण सिन्हा के साथ हुई घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय प्राधिकरण कब जागेगा?

समाज जागरण | नोएडा

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