शहडोल में ऑयल पेंट और ड्राई फ्रूट्स मामला: छुपा करोड़ों का घोटाला, सवाल- ये किसने हरा रंग डाला?

बोले कलेक्टर: छात्रावास में इकट्ठा क्रय हुआ ड्राई फ्रूट्स, तो क्या अन्य छात्रावासों में भी आता है इतना बजट… जिससे हो सके साल भर की खरीदी?

शहडोल। बीते कुछ दिनों में संभाग के विभागों में जो भी हुआ या जो हो रहा है, वह सामान्य प्रदर्शित नहीं। एक के बाद एक भ्रष्टाचार जिस तरह लगातार, शिक्षा विभाग व अन्य विभाग से निकल कर उजागर हुआ! यह न केवल प्रदेश अपितु राजधानी के धुरी में भी चर्चा का विषय बना। यह आदिवासी बाहुल्य अंचल, जो कल तलक अपनी कई अन्य विशेषताओं को लेकर जाना जाता रहा,, आज भ्रष्टाचारिता की ख्याति बटोर रहा है। पहले करोड़ों का भ्रष्टाचार, फिर ड्रैमेज कंट्रोल! मानो भ्रष्टाचारियों को संरक्षण? यहां सवाल यह भी है कि, कहीं यह कोई सोची समझी रणनीति और राजनीति का दर्शन तो नहीं?

कार्रवाई के इतर बयान अजीबोगरीब

खैर इतना तो जरूर तय है कि, यहां जो कुछ भी देखने मिला,, वह इस आदिवासी अंचल एवं जनहित में तो नहीं ही है। ऑयल पेंट और ड्राई फ्रूट्स बिल घोटाला सामने आने के बाद जिला प्रशासन की जांच व कार्रवाई मानो संरक्षण रूपी कवच मात्र ही प्रतीत है। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि, मामला उजागर होने के बाद जिम्मेदारों को नोटिस तो जारी हुई। लेकिन, किसी ठोस कार्रवाई किए जाने के इतर, बयान अजीबोगरीब? कहीं एआई जनरेटेड बिल का हवाला तो कहीं ग्राम पंचायत भदवाही में उक्त दिनांक को कार्यक्रम न होने और बिल नहीं काटे जाने की बात। कहीं तो बच्चों के लिए इकट्ठा ही (साल भर का) ड्राई फ्रूट्स क्रय किया जाना बताया जाना।

बयान कितनों के किए गए दर्ज

बड़ा प्रश्न यह है कि, इन पूरे मामले के सामने आने के बाद कितनों के बयान दर्ज किए गए? किस एक्सपर्ट से निपनिया व सकंदी पंचायत में लगे बिल की जांच कराई गई, जिससे बिल एआई जनरेटेड प्रमाणित हुआ! यह बताया नहीं गया? क्या कस्तूरबा गांधी छात्रावास टेटका में बच्चों के मीनू आधार पर ड्राई फ्रूट्स लिए गए? जिस मात्रा अनुरूप क्रय किया गया,, क्या उतने बच्चों की संख्या उस छात्रावास की उपस्थिति पंजी में दर्ज है? क्या बच्चों को उन ड्राई फ्रूट्स का स्वाद मिला भी या नहीं? क्या इस वर्ष की भांति, पिछले वर्षों में भी ड्राई फ्रूट्स क्रय हुआ, अगर हां तो… मात्रा कितनी रही?

तो क्यों दर्ज नहीं कराई पुलिस एफआईआर

बहरहाल, यह मान भी लें कि, पेंट घोटाला मामले में बिल फर्जी यानि कि,, एआई जनरेटेड है तो क्या इस मामले में पुलिस एफआईआर दर्ज कराई गई है… नहीं तो क्यों? माना, बिल एआई जनरेटेड है तो, वह कैसे शासकीय प्रक्रिया का हिस्सा बना? और संबंधित बिल का भुगतान आखिरकार किस माध्यम और आधार पर हुआ? सूत्रों की मानें तो, इस पूरे मामले में कार्रवाई किए जाने को लेकर भले ही जिला प्रशासन की मंशा बिल्कुल साफ है। लेकिन, सत्ताधीशों के दबाव में जिला प्रशासन स्वयं बचाव की मुद्रा में नजर आ रहा है। ऐसे कई और भी सवाल हैं। जिसका जवाब शायद जिला प्रशासन को खोजने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

इनका कहना है…

जांच कराया है। पेंट घोटाले को लेकर जो बिल वायरल हुआ, वह सही नहीं है। एआई जनरेटेड है। जिस दिन ग्राम भदवाही में कार्यक्रम आयोजन की बात कही गई, उस दिन आयोजन हुआ ही नहीं और न ही उस दिनांक को ड्राई फ्रूट्स क्रय किए जाने का बिल काटा गया है। टेटका छात्रावास में रहने वाले छात्रों के लिए इकट्ठा ही ड्राई फ्रूट्स क्रय किया गया है।

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