दैनिक समाज जागरण, ( महेन्द्र जावला बहल )
बहल, 29, अक्टूबर। सनातन परंपरा में कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि को गोपाष्टमी को गौमाता व गोवंश की पूजा करने का दिन होता है तथा गौपूजा और गौसेवा के लिए अत्यंत ही शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। हिंदू शास्त्रों की मान्यता के अनुसार गोमाता के शरीर में 33 कोटि देवी-देवता का वास रहता है। गोपाष्टमी पर्व के दिन गौमाता की पूजा व सेवा मात्र से इंसान के सारे कष्ट दूर और कामनाएं पूरी होती हैं। सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यह सद्विचार श्रीअलख आश्रम के महंत बाबा विकास गिरी महाराज ने श्रीअलख वृद्धाश्रम स्थित गौशाला की गोवंश की पूजा करने उपरांत उपस्थित श्रद्धालुओं के समक्ष व्यक्त किए। इस अवसर पर राष्ट्रीय कथा प्रवक्ता साध्वी गौसिका गिरी महंत बलवीर गिरी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि हिंदू मान्यता के अनुसार गोपाष्टमी के दिन गाय और उसके बछड़े की पूजा करना अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है। ऐसे में गोसेवा करने के लिए व्यक्ति को इस दिन स्नान-ध्यान करने के बाद सबसे पहले गोमाता को प्रणाम करके आशीर्वाद लेना चाहिए। इसके बाद गोमाता और गोवंश को स्नान कराकर उनकी सफाई करनी चाहिए।
इसके बाद गोमाता के शरीर को सुखाकर उनके सींग पर काले रंग का रंग लगाना चाहिए। साध्वी गोसिका गिरी ने भी बताया कि गोमाता हल्दी, चंदन, रोली आदि से तिलक करें तथा उन्हें फल-फूल, धूप-दीप आदि अर्पित करके उनकी ॐ नमो देव्यै महादेव्यै सुरभ्यै च नमो नमः मंत्र का उच्चारण कर पूजा करने का महत्व बनता है। गोपूजा करने के बाद गौमाता आरती कर आशीर्वाद का पुण्य प्राप्त करें। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक संगठनों के लोग साधु संत व महिलाएं भी इस माहत्म्य दिन पर पूजा कर पुण्य कमाया।
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