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पटना पुलिस ने किया अपहरण किये गए सेटर को बरामद

समाज जागरण पटना जिला संवाददाता:- वेद प्रकाश

पटना/ राजधानी पटना में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे एक कथित ठगी के नेटवर्क से जुड़ा एक युवक का अपहरण कर लिया गया। यह घटना 5 जनवरी को पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र में इस्कॉन मंदिर के पास हुई, जिसने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया। अपहरण का शिकार बने युवक संतोष को बाद में पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में नालंदा जिले के इस्लामपुर से सुरक्षित बरामद कर लिया गया। इस मामले में एक महिला समेत कुल छह लोगों की गिरफ्तारी की गई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि संतोष को पैसे के लेन-देन के बहाने बुलाया गया था। संतोष के अनुसार, अनुज, निशांत और विनोद नामक लोगों ने उसे इस्कॉन मंदिर के पास बुलाया।

वहां से उसे बाइक पर बैठाकर पहले रामकृष्णा नगर ले जाया गया। इसके बाद एक कार बुक कर उसे बिहारशरीफ ले जाया गया, जहां उसके साथ कथित तौर पर मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की गई। बाद में उसे नालंदा जिले के इस्लामपुर इलाके में एक घर में बंधक बनाकर रखा गया। संतोष पटना के नागेश्वर कॉलोनी स्थित अभिराम होटल में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करता है। पुलिस के अनुसार, वह नौकरी दिलाने वाले एक कथित नेटवर्क से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। आरोपियों का कहना है कि संतोष और होटल मालिक ने मिलकर कई लोगों से सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर मोटी रकम वसूली थी। यही रकम वापस लेने के लिए उन्होंने संतोष का अपहरण किया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उनसे और अन्य अभ्यर्थियों से सचिवालय में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब एक करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की गई थी। इसमें लगभग 67 लाख रुपये नकद और बाकी रकम बैंक खाते के जरिए ट्रांसफर की गई थी। अनुज नामक आरोपी के अनुसार, संतोष ने उनकी मुलाकात राकेश कुमार रंजन नाम के व्यक्ति से कराई थी, जिसने समाज कल्याण विभाग में सचिवालय सहायक पद पर नौकरी पक्की होने का भरोसा दिया था। आरोपियों का कहना है कि नौकरी के नाम पर उन्हें चार महीने की ट्रेनिंग भी दी गई थी।

शुरुआती एक महीने की सैलरी भी दी गई, जिससे उन्हें विश्वास हो गया कि नौकरी सच में लग गई है। लेकिन इसके बाद अचानक सैलरी बंद हो गई और संबंधित लोग बातचीत से भी कतराने लगे। जब उन्होंने गहराई से जांच की तो उन्हें समझ में आया कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं। जब उन्हें ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने अपने पैसे वापस लेने के लिए संतोष को दबाव में लेने का फैसला किया। इसी के तहत उन्होंने संतोष को बुलाकर अपने कब्जे में रखा। हालांकि पुलिस के अनुसार, चाहे कारण कुछ भी रहा हो, किसी व्यक्ति का अपहरण करना गंभीर अपराध है और इसे किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता। पुलिस ने इस मामले में अपहरण, अवैध हिरासत और ठगी से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। राकेश कुमार रंजन सहित अन्य संदिग्धों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। बैंक लेन-देन, कॉल डिटेल और डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।


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