समाज जागरण नोएडा डेस्क
आज हर तरफ एक दौड़ चल पड़ा है पुरस्कृत करने का और जिसे यह पुरस्कार न मिले उसमे असंतोष की भावना जागृत होने का। तो सवाल उठता है क्या हम सेवा कार्य या मदद पुरस्कृत होने के लिए करने लगे है ? टीवी से लेकर अखबारों तक और सोशल मिडिया के दीवारों तक पुरस्कार ही पुरस्कार है। ऐसे मे राकांपा के प्रदेश के उपाध्यक्ष बिनोधर ओझा ने पुरस्कार और तिरस्कार करने वालों से एक सवाल किया है:
प्रशासन के पुरस्कारों से लोगो में असंतोष नही होना चाहिए और न प्रशासन को पुरस्कृत करना चाहिए ! मैं इस विषण आपदा , दुख की घडी मैं, इस विषण रेल दुर्घटना में जिन लोगो ने जो सहयोग किया था क्या वह पुरस्कृत होने के लिए किया था ? यह पुरस्कार देना ही गलत था !
आजादी की लडाई चंद लोगो ने नही लड़ा था बल्कि देश के करोड़ो लोगों ने अपने अपने स्तर से लड़ा था ! लेकिन समय की विडंबना है कि चंद लोग स्वतंत्रता सेनानी का पेंशन पा रहे है ! इनसे पुछना चाहिए था कि आप पेंशन पाने के लिए आजादी की लडाई लडे थे ?

उसी तरह से जिला प्रशासन को स्थानीय और उसमें लगे सभी लोगो को सम्मानित करने की बात कहनी चाहिए था और प्रशंसा करनी चाहिए था ! इस तरह से असंतोष नही उभरता ! उक्त बाते राकांपा के प्रदेश के उपाध्यक्ष बिनोधर ओझा ने कही ! रेल दुर्घटना में सभी सहयोगियो को मैं बधाई देता हूँ और आपके सहयोग के लिए भूरी भूरी प्रशंशा करता हू ! आपने ब्रह्मपुर- रघुनाथपुर के क्षेत्र का नाम रौशन किया है ! दूर्घटना मे सभी उपस्थित व्यक्ति आपके प्रशंशा करते होगे और आशीर्वाद देते होगे ! इससे बडा सम्मान और क्या हो सकता है ?
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