एनएच 43 पर हादसों के समय तत्काल मदद का दावा सवालों के घेरे में, चौकी पर जड़ा ताला
हाईवे सुरक्षा भगवान भरोसे, यातायात प्रभारी की कार्यप्रणाली पर सवाल
अनूपपुर। जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 पर सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं के दौरान तत्काल सहायता उपलब्ध कराने, घायलो की मदद, यातायात नियंत्रण के उद्देश्य से संचालित यातायात हाईवे चौकी फुनगा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस मुख्यालय भोपाल के आदेश एवं राज्य शासन की मंजूरी के बाद 16 फरवरी 2025 में शुभारंभ इस चौकी के लिए स्वीकृत बल के अनुसार 11 पुलिसकर्मियों की पदस्थापना की गई थी। लेकिन यातायात प्रभारी विनोद दुबे ने अपने हित लाभ के कारण यातायात थाना से 17 अगस्त 2026 को पत्र जारी कर पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराब का हस्ताक्षर कराकर हाईवे चौकी में पदस्थ 10 पुलिसकर्मियों को वापस थाना यातायात में पदस्थ कराने का आदेश करवाते हुए हाईवे चौकी फुनगा को बंद करा दिया गया। जहां वर्तमान समय में चौकी पर ताला जड़ा हुआ है। यह पूरी योजना यातायात थाना प्रभारी विनोद दुबे द्वारा शासन की मंशा के खिलाफ जाकर किया जाना समझ से परे है।
15 माह में बंद हो गई हाईवे चौकी फुनगा
शासन की मंजूरी के बाद माह फरवारी 2025 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मोतीउर्र रहमान द्वारा हाईवे चौकी फुनगा का शुभारंभ किया गया तथा यातायात को व्यवस्थित करने 11 पुलिसकर्मियों का बल स्वीकृत किया गया, जिनमें 1 सूबेदार सहित सहायक उपनिरीक्षक 2, प्रधान आरक्षक 1, आरक्षक 6 तथा 1 चालक की पदस्थाना की गई थी। लेकिन मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब 17 अगस्त 2026 को एक आदेश जारी हुआ। जिसमें फुनगा हाईवे चौकी के लिए स्वीकृत एवं पदस्थ 11 कर्मचारियों में से 10 पुलिसकर्मियों को थाना यातायात में वापस बुला लिया गया।
स्थापना की जगह यातायात थाना से जारी हुआ आदेश
फुनगा हाईवे चौकी में पदस्थ 10 पुलिसकर्मियों को हटाकर यातायात थाना अनूपपुर में पदस्थ किए जाने का आदेश यातायात थाना से जारी पत्र में हुआ। जानकारी के अनुसार यातायात थाना से जारी पत्र क्रमांक पु.अ./अनूप./अनूप./यातायात/अनूप./यातायात/355/अनूप./यातायात/355/2026, दिनांक 17 अगस्त 2026 को जारी होता है। जबकि उक्त आदेश पुलिस अधीक्षक कार्यालय अनूपपुर के स्थापना विभाग से जारी होना चाहिए था। उक्त आदेश में अनूपपुर जिले में यातायात व्यवस्था के सुचारू एवं प्रभावी संचालन तथा उपलब्ध बल की कमी को बताते हुए यातायात हाईवे सुरक्षा चौकी में पदस्थ समस्त बल एक सहायक उपनिरीक्षक को छोड़कर तत्काल प्रभाव से थाना यातायात अनूपपुर में पदस्थ किया गया तथा थाना प्रभारी यातायात विनोद दुबे को हाईवे चौकी फुनगा का समस्त प्रबंधन, ड्यूटी व्यवस्था, देखरेख एवं आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही जिला मुख्यालय से देखरेख करने का आदेश जारी करवाया गया।
यातायात प्रभारी को 25 का बल पड़ रहा था कम
जिला मुख्यालय में यातायात को व्यवस्थित करने 10 प्वांइट बनाये गये है, जिसमें 4 नो इंट्री प्वांइट है। वहीं यातायात प्रभारी के पास समस्त 25 पुलिस कर्मियों का बल कम पड़ा और उन्हे हाईवे चौकी फुनगा से 11 में से 10 बल को यातायात थाना लाना पड़ा। वहीं वर्तमान समय में यातायात थाने में 35 बल, जिनमें निरीक्षक 1, सहायक उपनिरीक्षक 7, प्रधान आरक्षक 7, आरक्षक 17 है। जिनमें 4 पुलिस कर्मियों को कागजो में अमरकंटक में लगाया गया है। इतने बल के बाद भी जिला मुख्यालय में नो इंट्री प्वांइट को छोड़कर यातायात को व्यवस्थित बनाये रखने बाकी 6 प्वांइटो ज्यादातर खाली मिलते है।
चौकी का बल हटाने का क्या था उद्देश्य
यातायात प्रभारी विनोद दुबे की निष्क्रयता वा उनकी कार्यप्रणाली पूरी तरह से संदेह के घेरे में है। आखिरकार फुनगा हाईवे चौकी से हटाए गए पुलिसकर्मियों को थाना यातायात में तैनात करने का उद्देश्य समझ से परे है। वहीं एडवोकेट संजीव द्विवेदी ने बताया कि हाईवे चौकी के अतिरिक्त बल का उपयोग वाहन चेकिंग और वसूली के लिए किया जा रहा है। जहां दिन रात हाईवे में खड़े होकर भारी वाहनो को रूकाना भी संदेह के घेरे में है। चौकी में स्वीकृत बल के मुकाबले केवल एक कर्मचारी के भरोसे किसी बड़े हादसे या एक साथ कई घटनाओं की स्थिति लोगो को तत्काल पुलिस सहायता कैसे उपलब्ध कराई जायेगी, इसकी कोई कार्ययोजना रणनीति तक नही बनाई गई। जबकि यातायात थाना से हाईवे चौकी फुनगा की दूरी लगभग
दुर्घटना के समय कौन संभालेगा मोर्चा
फुनगा हाईवे चौकी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे है, चौकी का समस्त बल हटा दिये जाने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर गंभीर सड़क दुर्घटना होने की स्थिति में तत्काल सहायता की जिम्मेदारी स्वयं पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराब लेगे या फिर इसकी जवाबदेही थाना प्रभारी विनोद दुबे की होगी। किसी भी दुर्घटना और घायलो की सुरक्षा को लेकर थाना यातायात को फुनगा हाईवे चौकी या हाईवे जैसी संवेदनशील जगह तक पहुंचने में 38 मिनट का समय लगता है, तो दुर्घटना में घायल लोगों को शुरुआती उपचार एवं सहायता मिलने में देरी होना स्वाभिक है साथ ही यातायात नियमों के खिलाफ है।
इनका कहना है
पूरे मामले की जानकारी मिली है, निश्चित ही निश्चित ही पूरे मामले को प्राथमिकता से संज्ञान में लेकर जांच की जाएगी।
टी.के. विद्यार्थी, डीआईजी पीटीआरआई पीएचक्यू भोपाल
Discover more from समाज जागरण
Subscribe to get the latest posts sent to your email.



