पर्यटन और आस्था का संगम है झारखंड प्रदेश के रजरप्पा का शक्ति पीठ मां छिन्नमस्तिका की मंदिर।
समाज जागरण, श्रवण सिंह ब्यूरो चीफ, रामगढ़ ।
रामगढ़ ( झारखंड ) 4 फरवरी 2023:- रजरप्पा राजधानी रांची से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर रामगढ़ जिले के अंतर्गत मां छिन्नमस्तिके का यह मंदिर है। रजरप्पा के भैरवी-भेड़ा और दामोदर नदी के संगम पर स्थित मां छिन्नमस्तिके मंदिर आस्था की धरोहर है।
असम के कामाख्या मंदिर के बाद दुनिया के दूसरे सबसे बड़े शक्तिपीठ के रूप में झारखंड प्रदेश का रजरप्पा के विख्यात मां छिन्नमस्तिके मंदिर है जो काफी लोकप्रिय है।
रजरप्पा का यह सिद्धपीठ केवल एक मंदिर के लिए ही विख्यात नहीं है। छिन्नमस्तिके मंदिर के अलावा यहां महाकाली मंदिर, सूर्य मंदिर, दस महाविद्या मंदिर, बाबाधाम मंदिर, बजरंग बली मंदिर, शंकर मंदिर और विराट रूप मंदिर के नाम से कुल 7 मंदिर हैं। पश्चिम दिशा से दामोदर तथा दक्षिण दिशा से कल-कल करती भैरवी नदी का दामोदर में मिलना मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लगा देता है।
दामोदर और भैरवी के संगम स्थल के समीप ही मां छिन्नमस्तिके का मंदिर स्थित है। मंदिर की उत्तरी दीवार के साथ रखे एक शिलाखंड पर दक्षिण की ओर मुख किए माता छिन्नमस्तिके का दिव्य रूप अंकित है।
मंदिर के निर्माण काल के बारे में पुरातात्विक विशेषज्ञों में मतभेद है। किसी के अनुसार मंदिर का निर्माण 6,000 वर्ष पहले हुआ था तो कोई इसे महाभारत युग का मानता है। यह दुनिया के दूसरे सबसे बड़े शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है।
असम स्थित मां कामाख्या मंदिर को सबसे बड़ा शक्तिपीठ माना जाता है। मंदिर में बड़े पैमाने पर विवाह भी संपन्न कराए जाते हैं।
मंदिर में प्रातःकाल 4 बजे माता का दरबार सजना शुरू होता है। भक्तों की भीड़ भी सुबह से पंक्तिबद्ध खड़ी रहती है, खासकर शादी-विवाह, मुंडन-उपनयन के लगन और दशहरे के मौके पर भक्तों की 3-4 किलोमीटर लंबी लाइन लग जाती है। इस भीड़ को संभालने और माता के दर्शन को सुलभ बनाने के लिए कुछ माह पूर्व पर्यटन विभाग द्वारा गाइडों की नियुक्ति की गई है। आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय पुलिस भी मदद करती है।
मंदिर के आसपास ही फल-फूल, प्रसाद की कई छोटी-छोटी दुकानें हैं। आमतौर पर लोग यहां सुबह आते हैं और दिनभर पूजा-पाठ और मंदिरों के दर्शन करने के बाद शाम होने से पूर्व ही लौट जाते हैं। ठहरने की अच्छी सुविधा यहां अभी उपलब्ध नहीं हो पाई है।
मां छिन्नमस्तिके मंदिर के अंदर स्थित शिलाखंड में मां की 3 आंखें हैं। बायां पांव आगे की ओर बढ़ाए हुए वे कमल पुष्प पर खड़ी हैं। पांव के नीचे विपरीत रति मुद्रा में कामदेव और रति शयनावस्था में हैं। मां छिन्नमस्तिके का गला सर्पमाला तथा मुंडमाल से सुशोभित है। बिखरे और खुले केश, जिह्वा बाहर, आभूषणों से सुसज्जित मां नग्नावस्था में दिव्य रूप में हैं। दाएं हाथ में तलवार तथा बाएं हाथ में अपना ही कटा मस्तक है। इनके अगल-बगल डाकिनी और शाकिनी खड़ी हैं जिन्हें वे रक्तपान करा रही हैं और स्वयं भी रक्तपान कर रही हैं। इनके गले से रक्त की 3 धाराएं बह रही हैं।
मंदिर का मुख्य द्वार पूरबमुखी है। मंदिर के सामने बलि का स्थान है। बलि स्थान पर प्रतिदिन औसतन 100-200 बकरों की बलि चढ़ाई जाती है। मंदिर की ओर मुंडन कुंड है। इसके दक्षिण में एक सुंदर निकेतन है जिसके पूर्व में भैरवी नदी के तट पर खुले आसमान के नीचे एक बरामदा है। इसके पश्चिम भाग में भंडारगृह है।
रुद्र भैरव मंदिर के नजदीक एक कुंड है। मंदिर की भित्ति 18 फुट नीचे से खड़ी की गई है। नदियों के संगम के मध्य में एक अद्भुत पापनाशिनी कुंड है, जो रोगग्रस्त भक्तों को रोगमुक्त कर उनमें नवजीवन का संचार करता है।
यहां मुंडन कुंड, चेताल के समीप ईशान कोण का यज्ञ कुंड, वायु कोण कुंड, अग्निकोण कुंड जैसे कई कुंड हैं। दामोदर के द्वार पर एक सीढ़ी है। इसका निर्माण 22 मई 1972 को संपन्न हुआ था। इसे तांत्रिक घाट कहा जाता है, जो 20 फुट चौड़ा तथा 208 फुट लंबा है। यहां से भक्त दामोदर में स्नान कर मंदिर में जा सकते हैं।
दामोदर और भैरवी नदी का संगम स्थल भी अत्यंत मनोहारी है। भैरवी नदी स्त्री नदी मानी जाती है जबकि दामोदर पुरुष। संगम स्थल पर भैरवी नदी ऊपर से नीचे की ओर दामोदर नदी के ऊपर गिरती है। कहा जाता है कि जहां भैरवी नदी दामोदर में गिरकर मिलती है उस स्थल की गहराई अब तक किसी को पता नहीं है।
आगे पढ़ें मां छिन्नमस्तिके की महिमा बताती पौराणिक कथाएं
मां छिन्नमस्तिके की महिमा की पौराणिक कथाएं
मां छिन्नमस्तिके की महिमा की कई पुरानी कथाएं प्रचलित हैं। प्राचीनकाल में छोटा नागपुर में रज नामक एक राजा राज करते थे। राजा की पत्नी का नाम रूपमा था। इन्हीं दोनों के नाम से इस स्थान का नाम रजरूपमा पड़ा, जो बाद में रजरप्पा हो गया।
एक कथा के अनुसार एक बार पूर्णिमा की रात में शिकार की खोज में राजा दामोदर और भैरवी नदी के संगम स्थल पर पहुंचे। रात्रि विश्राम के दौरान राजा ने स्वप्न में लाल वस्त्र धारण किए तेज मुख मंडल वाली एक कन्या देखी।
उसने राजा से कहा- हे राजन, इस आयु में संतान न होने से तेरा जीवन सूना लग रहा है। मेरी आज्ञा मानोगे तो रानी की गोद भर जाएगी।
राजा की आंखें खुलीं तो वे इधर-उधर भटकने लगे। इस बीच उनकी आंखें स्वप्न में दिखी कन्या से जा मिलीं। वह कन्या जल के भीतर से राजा के सामने प्रकट हुई। उसका रूप अलौकिक था। यह देख राजा भयभीत हो उठे।
राजा को देखकर देख वह कन्या कहने लगी- हे राजन, मैं छिन्नमस्तिके देवी हूं। कलियुग के मनुष्य मुझे नहीं जान सके हैं जबकि मैं इस वन में प्राचीनकाल से गुप्त रूप से निवास कर रही हूं। मैं तुम्हें वरदान देती हूं कि आज से ठीक नौवें महीने तुम्हें पुत्र की प्राप्ति होगी।






देवी बोली- हे राजन, मिलन स्थल के समीप तुम्हें मेरा एक मंदिर दिखाई देगा। इस मंदिर के अंदर शिलाखंड पर मेरी प्रतिमा अंकित दिखेगी। तुम सुबह मेरी पूजा कर बलि चढ़ाओ। ऐसा कहकर छिन्नमस्तिके अंतर्ध्यान हो गईं। इसके बाद से ही यह पवित्र तीर्थ रजरप्पा के रूप में विख्यात हो गया।
एक अन्य कथा के अनुसार एक बार भगवती भवानी अपनी सहेलियों जया और विजया के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान करने गईं। स्नान करने के बाद भूख से उनका शरीर काला पड़ गया। सहेलियों ने भी भोजन मांगा। देवी ने उनसे कुछ प्रतीक्षा करने को कहा।
बाद में सहेलियों के विनम्र आग्रह पर उन्होंने दोनों की भूख मिटाने के लिए अपना सिर काट लिया। कटा सिर देवी के हाथों में आ गिरा व गले से 3 धाराएं निकलीं। वह 2 धाराओं को अपनी सहेलियों की ओर प्रवाहित करने लगीं। तभी से ये छिन्नमस्तिके कही जाने लगीं।
रजरप्पा के स्वरूप में अब बहुत परिवर्तन आ चुका है। तीर्थस्थल के अलावा यह पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित हो चुका है। आदिवासियों के लिए यह त्रिवेणी है। मकर संक्रांति के मौके पर लाखों श्रद्धालु आदिवासी और भक्तजन यहां स्नान व चौडाल प्रवाहित करने तथा चरण स्पर्श के लिए आते हैं। अब यह पर्यटन स्थल का मुख्य केंद्र है।
कैसे पहुंचें?
झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर मां छिन्नमस्तिके मंदिर के निकट ठहरने के लिए उत्तम व्यवस्था है। मंदिर तक जाने के लिए पक्की सड़क है। यह पर्यटन स्थल का मुख्य केंद्र है। सुबह से शाम तक मंदिर पहुंचने के लिए बस, टैक्सियां उपलब्ध हैं।
- मेहरमा में मां अन्नपूर्णा यज्ञ और श्रीमद् भागवत कथा महायज्ञ को लेकर निकली भव्य और आकर्षक कलश शोभायात्रासमाज जागरण मनोज कुमार साहगोड्डामेहरमा: चैती दुर्गा पूजा और रामनवमी के अवसर पर मेहरमा में आयोजित श्री श्री 108 विराट मां अन्नपूर्णा यज्ञ-प्रज्ञ-कम॔ एवं श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ को लेकर गुरुवार को भव्य व आकर्षक कलश शोभा यात्रा निकाली गई।जिसे सिन्हा इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन निरंजन कुमार सिन्हा व अन्य ने फीता काटकर रवाना…
- कथा का मूल उद्देश्य समाज में संस्कारों और धर्म के प्रति आस्था को बढ़ावा देना- दिलीप कृष्ण भारद्वाजसंवाददाता आदिवासी सुनील त्रिपाठी। दैनिक समाज जागरण चोपन/ सोनभद्र। काली मंदिर पर चल रहे श्रीराम कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीराम की बाल लीलाओं का अद्भुत वर्णन सुना। अंतराष्ट्रीय कथा वाचक दिलीप कृष्ण भारद्वाज जी ने श्रीराम के जन्म से लेकर उनके बाल्यकाल की दिव्य घटनाओं का सजीव चित्रण किया। कथा के दौरान…
- पुस्तैनी मकान पर कब्जा करने की नीयत से किया ध्वस्त, मुकदमा दर्जसमाज जागरण धनंजय मोदनवालपिंडरा।सिंधोरा थाना क्षेत्र के ओदार निवासी रामनिहोर पांडेय ने पुस्तैनी मकान को गिराने का आरोप लगाते हुए मारपीट व जान से मारने की धमकी देने के तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करायापुलिस को दिए तहरीर में रामनिहोर पांडेय ने आरोप लगाया कि उसकी पुस्तैनी घर जो जर्जर था और गिर रहा…
- थूक में सत्तू घोल रहा प्रबंधनध्वस्त पुलिया के स्थान पर मिट्टी रेत की बोरियों से बना दिया रपटा फोटो 02 धनपुरी। सोहागपुर कोयलांचल प्रबंधन द्वारा थूक में सत्तू घोलने की कहावत को चरितार्थ करने का प्रयास किया जा रहा है। कैसे यह जानना जरूरी है- पहली बारिश से पूर्व में क्षतिग्रस्त पुल के बगल में आखिरकार कालरी प्रबंधन के द्वारा…
- सड़क बनते ही निकल आए गड्ढेनगर पालिका द्वारा वार्ड के अंदर बनवाई जा रही सड़कों में गुणवत्ता का अभाव फोटो 02 धनपुरी। स्थानीय नगर प्रशासन द्वारा वार्ड नंबर 24/25 एवं अन्य वार्डों में सीमेंटेड रोड के ऊपर डामरीकृत सड़क बनाई गयी है। 4 दिन पहले रोड बनाईं गई है वाहन के निकलते ही जगह जगह से रोड में गढ्ढे दिखने…