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समर्पण शोध संस्थान में यज्ञोपवीत संस्कार संम्पन्न*

यज्ञोपवीत संस्कार मानव निर्माण की आधार शिला है-राष्ट्रीय महामंत्री महेंद्र भाई*

*यज्ञोपवीत माता,पिता व गुरु ऋण से उऋण होने का संदेश देता है-ओमपाल शास्त्री*

गाजियाबाद,रविवार,10 अगस्त 2025 को केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के आह्वाहन पर आर्य समाज समर्पण शोध संस्थान 4/42,सैक्टर 5,राजेन्द्र नगर साहिबाबाद में श्रावणी पर्व के उपलक्ष्य में सामवेद यज्ञ एवं यज्ञोपवीत संस्कार समारोह का आयोजन किया गया।



यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य ओमपाल शास्त्री ने यज्ञ करवाया और यज्ञोपवीत धारण करवाया आज के मुख्य यज्ञमान श्रीमती शोभना भटनागर एवं रमेश भटनागर तथा सविता भटनागर,उमा भटनागर आदि रहे।उन्होंने यज्ञोपरांत यज्ञमानों आशीर्वाद प्रदान किया एवं परमपिता परमात्मा से उनके सुखद जीवन की कामना की। आज श्रद्धालुओं ने दुर्व्यसन त्यागने की प्रतिज्ञा ली और संकल्प लिया कि माता पिता गुरु जनों का सम्मान करेंगे।

मुख्य वक्ता केन्द्रीय आर्य युवक परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री आचार्य महेन्द्र भाई ने कहा कि एक ईश्वर की पूजा,मन वचन कर्म से एक होने पर हम संगठित हो सकते हैं।सत्य बोलने से हमारी संसार में विश्वसनीयता रहती है।व्यक्ति का निज जीवन समाज के लिए आदर्श होना चाहिए आपके जीवन को देखकर ही व्यक्ति आप के अनुगामी बनेंगे उपनयन का अर्थ है समीपता को प्राप्त करना आचार्य की सामिप्यता को प्राप्त करके बालक अपने जीवन को समुन्नत करता है।शिक्षा व्यक्ति को काम करने में समर्थ बनाती है।उपनयन संस्कार मानव निर्माण की आधार शिला है।यज्ञोपवीत के तीन धागे स्व जीवन को समुन्नत बनाना तथा राष्ट्र के लिए भावी संतति को समुन्नत बनाकर देने के व्रत के प्रतीक हैं।प्रत्येक भारतीय का यह संस्कार होना चाहिए।

वैदिक प्रवक्ता राकेश भटनागर ने बताया कि स्वामी दीक्षानंद द्वारा लिखित पुस्तक उपनयन सर्वस्व में उन्होंने लिखा है कि यह प्रजापति का सूत्र है।यज्ञोपवीत त्रिसूत्र उसकी नकल है।प्राण,वाणी,मन द्वारा मुलाधार चक्र से सहस्त्रार चक्रों पर ध्यान केन्द्रीत करता हुआ मानव ब्रह्मरंद्र में परमात्मा को प्राप्त हो जाता है।

सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक मास्टर विजेन्द्र आर्य,योगी प्रवीण आर्य ने ईश्वर भक्ति के गीतों को सुनाकर भावविभोर कर दिया।

महायज्ञ के ब्रह्मा ओमपाल शास्त्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि यज्ञोपवीत हमारी पुरातन आर्य संस्कृति का प्रतीक हैं।यज्ञोपवीत के तीन तार माता,पिता व गुरु जनों के ऋण को स्मरण कराते रहते हैं हमे इनके उपकारों को याद रखते हुए उनका आदर व सम्मान करना चाहिए।

मुख्य रूप से सर्वश्री आर्य बंधु देवेन्द्र आर्य,केके यादव,डॉ प्रमोद सक्सेना, ज्ञान प्रकाश गर्ग,शरद कुमार आर्य,सत्यवीर, सुरेन्द्र सिंह,विजेन्द्र सिंह आर्य,देववृत्त कुंडू,रामपाल चौहान आदि उपस्थित रहे।

मंच का कुशल संचालन मंत्री सुरेश आर्य ने किया उन्होंने दयानंद जीवन चरित्र नामक पुस्तक सभी को नि:शुल्क वितरित की।

आचार्य वेद प्रकाश शास्त्री ने शांतिपाठ कराया एवं अल्पाहार वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।


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