युवा महोत्सव में दिखी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की झलक, सनातन संस्कृति और विरासत संरक्षण पर हुआ मंथन
ग्रेटर नोएडा, 22 अक्टूबर। नॉलेज पार्क स्थित शारदा विश्वविद्यालय में उत्तर प्रदेश सूचना विभाग की ओर से आयोजित युवा महोत्सव ‘सनातनी शंखनाद 2026’ में प्रदेश भर से आए आठ हजार से अधिक युवाओं ने भाग लिया। महोत्सव में सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के दौरान ‘भाषा अनेक, भाव एक’ का संदेश देते हुए विविधता में एकता की भावना को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।
सांस्कृतिक जड़ों से युवाओं को जोड़ने पर जोर
‘विविध भारत: उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव’ विषय पर आधारित इस युवा महोत्सव का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और उसके संरक्षण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था। कार्यक्रम में संवाद, संस्कृति और साधना का समन्वय देखने को मिला। युवाओं ने भारतीय परंपराओं, धार्मिक विविधता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे।
सनातन संस्कृति की तार्किकता पर हुई चर्चा
महोत्सव के वैचारिक सत्रों में सनातन परंपरा के वैज्ञानिक एवं तार्किक आधार, भारतीय संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता, आध्यात्मिक ज्ञान और राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की भूमिका पर चर्चा की गई। प्रख्यात संत बालकानंद गिरि जी महाराज, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु जैन, साध्वी डॉ. शिवानी भारती और काजल हिंदुस्तानी ने युवाओं से संवाद किया।
वक्ताओं ने सनातन संस्कृति, सांस्कृतिक पहचान और युवा शक्ति के महत्व पर विचार व्यक्त किए। साथ ही वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक गतिविधियों, धार्मिक पर्यटन और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया।
नृत्य और भक्ति संगीत ने बांधा समां
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोक नृत्य, कथक, भरतनाट्यम, भक्ति संगीत और नाट्य मंचन की प्रस्तुतियां हुईं। शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा को समर्पित विशेष नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हुए सांस्कृतिक परिवर्तनों पर आधारित गीत और दृश्य प्रस्तुति को भी सराहना मिली।
महोत्सव का समापन केशवम बैंड की संगीत संध्या के साथ हुआ। आधुनिक संगीत और भजनों के संगम ने कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं में उत्साह भर दिया। आयोजन के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को अपनी परंपराओं से जोड़ने का संदेश दिया गया।
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