*समाज जागरण, पटना
जिला संवाददाता: वेद प्रकाश**
बिहार में सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा कदम उठाया है। अब सभी **डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी** अनिवार्य कर दी गई है। विभाग का दावा है कि इससे अस्पतालों में अनुशासन बढ़ेगा, डॉक्टरों की जवाबदेही तय होगी और मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध हो सकेगा।

### **स्वास्थ्य विभाग का नया निर्देश**
* निर्धारित ड्यूटी रोस्टर के अनुसार बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य
* अनावश्यक रेफरल पर रोक
* इलाज में SOP के पालन का निर्देश
* अस्पतालों में डिजिटलीकरण को बढ़ावा
* रात्रि पाली के डॉक्टरों के लिए भी सुबह उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य
स्वास्थ्य मंत्री **निशांत कुमार** ने अधिकारियों को अस्पतालों की नियमित मॉनिटरिंग करने और लापरवाह कर्मचारियों पर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
### **डॉक्टर नाराज़, सड़क पर उतरे**
सरकार के फैसलों, खासकर **11 अप्रैल को निजी प्रैक्टिस पर लगाई गई रोक**, के खिलाफ डॉक्टरों ने जोरदार विरोध जताया है। रविवार को पटना स्थित **IMA भवन** में ‘**बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ**’ का महासम्मेलन हुआ, जिसके बाद डॉक्टरों ने **जेपी गोलंबर तक पैदल मार्च** निकाला।
### **डॉक्टरों की मुख्य मांगें**
संघ के प्रवक्ता **डॉ. विनय कुमार** ने कहा कि डॉक्टर सेवाभाव से काम करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिलना चाहिए।
मांगें इस प्रकार हैं—
* अस्पतालों में सशस्त्र सुरक्षा गार्ड की तैनाती
* डॉक्टरों के लिए सुरक्षित आवास और सुरक्षा व्यवस्था
* प्रशासनिक पदों पर बैठे चिकित्सा पदाधिकारियों को वाहन सुविधा
* ‘चिकित्सा सेवा संस्थान एवं व्यक्ति सुरक्षा कानून’ को प्रभावी रूप से लागू करना
### **आगे क्या?**
सरकार की सख्ती और डॉक्टरों के विरोध के बीच सवाल यह है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का दावा कितना वास्तविक लाभ मरीजों तक पहुँचा पाएगा।
फिलहाल इस मुद्दे पर पूरे राज्य में बहस जारी है।
आपकी क्या राय हैँ हमें जरूर बताये कमेंट बॉक्स मे
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