श्री राम ने तोड़ा धनुष और लक्ष्मण ने भरा परशुराम का दम्भ

*श्री महादेव का महाधनुष अत्यंत विदित और अनुपम है।

*हरहुआ का प्रसिद्ध धनुष यज्ञ का रामलीला श्री राम जयघोष के साथ सम्पन्न।
समाज जागरण अनिल कुमार
हरहुआ वाराणसी
हरहुआ की सुप्रसिद्ध रामलीला में फुलवारी,धनुष यज्ञ, परशुराम लक्ष्मण संवाद का प्रसंग आज आकर्षण का केंद्र रहा। रामलीला मैदान भारी भीड़, आकर्षक सजावट से खामोश हर पल धनुष टूटने का इंतजार करता रहा।
आज की अलौकिक छवि को जनता निहारती, और संवाद से श्रोतागण मंत्र मुक्त हो रहे थे
जैसे वास्तव मे महाराज जनक के पुष्प वाटिका ही हरहुआ मैदान मे उतर आया हो।
महाराज जनक ने प्रतिज्ञा ली थी कि जो भगवान शिव की पिनाक की प्रत्यंचा चढ़ाएगा(तोड़ेगा) सीता का विवाह उसी वीर के साथ होगा।
इसी क्रम में अनेक देश देशांतर के राजा, महाराजा आए हुए थे जिनमे स्वयं रावण, बाणासुर और अन्य महावीर अपने- अपने क्षमताओं(बल) का प्रदर्शन किया परंतु भगवान शिव के धनुष का प्रत्यंचा चढ़ना तो दूर किसी कोई उसे एक स्थान से हिला भी नहीं पाया। इसे देख महाराज जनक अधीर हो गए और कहने लगे कि लगता है यह वसुंधरा वीरों से खाली है, शायद विधाता ने सीता के भाग्य में विवाह लिखा ही नहीं है।
यह सुनकर लक्ष्मण जी क्रोध करते हुए कहा जिस सभा में एक भी रघुकुल का व्यक्ति बैठा हो वह यह अनुचित भाषा सुन नहीं सकता।यह तो पुराना धनुष है अगर गुरुदेव आप आज्ञा दे तो इसको मैं छोटे-छोटे टुकड़े करके ब्रह्मांड में गेंद की भाति उड़ा दूं। महर्षि विश्वामित्र ने श्री राम को धनुष उठाने के लिए कहा श्री रामचंद्र जी सहज भाव से धनुष उठाने के लिए उठते हैं सभा मे उपस्थित अन्य राजा हंसने लगते है और महारानी स्वयं भी कहने लगती है कि यह छोटे से बालक को धनुष उठाने को कहते हैं यह छोटा सा बालक इतना सुकुमार है क्या यह धनुष उठा पाएंगे!
‘गुरु ही प्रणाम मन नहीं मन की ना आती राघव उठा धनु लिन्हा ‘
धनुष के टूटते ही एक तेज़ की ध्वनि गूंजती है आकाश में बिजली की चमक ,कड़कड़ाहट से सभी डर जाते हैं और उधर सीता जी जयमाल लेकर सखियों सहित श्री राम जी को जयमाल डालने के लिए आती हैं और दूसरी तरफ धनुष की आवाज़ से परशुराम जी जाग जाते हैं और उनकी गति मन के समान तीव्र चलने की थी वह जनकपुर पहुंचते हैं और धनुष को देखकर क्रोध स्वर में पूछ रहे हैं। यह धनुष किसने तोड़ा है !किसका काल आ गया है! जिसने शिव धनुष तोडा है वह इस फरसे के काल से बच नहीं पायेगा। तभी
श्री राम जी ने कहा यह कोई आपका दास ही होगा मुनिवर! ऐसे ही सुंदर प्रसंग के साथ लक्ष्मण जी ने क्रोध में पधारे मुनि परशुराम से क्रोध संवाद करके दम्भ भरने का सराहनीय प्रस्तुति से रामलीला मैदान पूरी तरह से ठहर सा गया और कुछ ही पल में परशुराम जी को भान हुआ और भगवान की परीक्षा लेकर उनके श्री चरणों मे नतमस्तक हो गए। भारी भीड़ श्री राम की जयघोष से गुंजायमान हो उठा। प्रसिद्ध रामलीला में आतिशबाजी के साथ -साथ हर हर महादेव के साथ प्रसंग समाप्त हुआ।
श्री रामलीला समिति हरहुआ ने समस्त पात्र जनों की आरती उतारी और सभी भक्तजनों को भगवान से मंगल कामना का आशीर्वाद प्रदान किया।

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