सोनभद्र के गुलरिहवा में 30-32 परिवार वर्षों से सड़क-पुलिया के इंतजार में, नाले में उतरकर ग्रामीणों के साथ युवा नेता दीपू शर्मा ने किया प्रदर्शन
समाज जागरण/अनिल कुमार अग्रहरी
डाला (सोनभद्र)। आज भी गांवों में बुनियादी सुविधाओं की कमी किस तरह लोगों की जिंदगी और बच्चों के भविष्य पर भारी पड़ रही है, इसकी तस्वीर विकास खंड चोपन की ग्राम पंचायत पड़रछ के टोला गुलरिहवा में देखने को मिल रही है। यहां करीब 30-32 परिवार वर्षों से सड़क और पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में परेशान हैं। ग्रामीणों के आवागमन का एकमात्र रास्ता बदहाल है। करीब तीन किलोमीटर संपर्क मार्ग का निर्माण नहीं होने और बीच में पड़ने वाले नाले पर पुलिया नहीं होने से ग्रामीणों को रोजाना जोखिम उठाना पड़ता है।
इस समस्या को लेकर युवा नेता दीपू शर्मा ग्रामीणों के साथ नाले में उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शन के दौरान आठवीं कक्षा की छात्रा खुशी कुमारी ने जिलाधिकारी से भावुक अपील करते हुए कहा, “साहब! हमारे गांव में सड़क और पुलिया बनवा दीजिए, ताकि हम बच्चे बिना किसी परेशानी और डर के स्कूल जा सकें।” छात्रा की इस गुहार ने गांव में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को सामने ला दिया।
नाले के तेज बहाव में बह चुका है आठवीं का छात्र
गांव की समस्या कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा आठवीं कक्षा के छात्र विनय कुमार की आपबीती से लगाया जा सकता है। उसने बताया कि पिछले बरसात के मौसम में स्कूल से घर लौटते समय वह नाले के तेज बहाव में बहकर कुछ दूर चला गया था। गनीमत रही कि उसके साथ मौजूद साथियों ने साहस दिखाते हुए उसे बचा लिया। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया नहीं होने के कारण स्कूली बच्चों को हर दिन खतरे के बीच आवागमन करना पड़ता है।
बीमारी और आपातकाल में बढ़ जाती है परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होने पर मरीज को अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। बरसात के दिनों में नाले का जलस्तर बढ़ने से आवागमन बाधित हो जाता है और लोग गांव के बाहर जाने में असमर्थ हो जाते हैं। महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और मजदूरों को भी रोजमर्रा के कामों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
तीन किलोमीटर सड़क और पुलिया निर्माण की मांग
युवा नेता दीपू विजय शर्मा ने कहा कि यह केवल सड़क और पुलिया का मामला नहीं, बल्कि 30-32 परिवारों की जिंदगी, बच्चों की शिक्षा और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर विकास योजनाओं का लाभ गांव के अंतिम छोर पर बसे इन परिवारों तक कब पहुंचेगा?
उन्होंने जिलाधिकारी से ग्राम पंचायत पड़रछ के टोला गुलरिहवा में लगभग तीन किलोमीटर संपर्क मार्ग का निर्माण कराने और नाले पर प्राथमिकता के आधार पर पुलिया बनवाने की मांग की, ताकि ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
दीपू शर्मा ने कहा कि जब आठवीं कक्षा की छात्रा को स्कूल जाने के लिए जिलाधिकारी से गुहार लगानी पड़े, तो यह ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीरता से विचार करने का विषय है। गुलरिहवा के ग्रामीण भी सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन के हकदार हैं। प्रशासन को उनकी समस्या का जल्द समाधान करना चाहिए।
Discover more from समाज जागरण
Subscribe to get the latest posts sent to your email.



