रिहंद, कनहर और नगवां बांध से प्रभावित परिवारों को स्थायी भूमि अधिकार, रोजगार और मूलभूत सुविधाएं देने की मांग
समाज जागरण/अवधेश कुमार गुप्ता
सोनभद्र। जिले में बांध और औद्योगिक परियोजनाओं से विस्थापित परिवारों के अधिकारों एवं पुनर्वास का मुद्दा एक बार फिर उठने लगा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) जिला काउंसिल सोनभद्र ने विस्थापितों की समस्याओं को लेकर राष्ट्रपति के नाम 11 सूत्रीय मांगपत्र भेजा है। इसमें रिहंद, कनहर और नगवां बांध सहित विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों को स्थायी भूमि अधिकार, रोजगार, समुचित पुनर्वास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
भाकपा जिला सह सचिव देव कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि वर्ष 1960 में रिहंद बांध के निर्माण के दौरान हजारों परिवार विस्थापित हुए थे। इसके बावजूद आज भी अनेक परिवार सरकारी भूमि पर स्थायी भौमिक अधिकार और समुचित पुनर्वास के लाभ से वंचित हैं। विस्थापित परिवारों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने स्थानीय युवाओं को क्षेत्र के औद्योगिक संस्थानों में प्राथमिकता के आधार पर स्थायी रोजगार देने की मांग भी उठाई।
वनाधिकार कानून लागू करने और प्रदूषण की जांच की मांग
मांगपत्र में वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत पात्र आदिवासियों एवं अन्य परंपरागत वन निवासियों को भूमि का अधिकार देने की मांग की गई है। साथ ही 75 वर्ष के साक्ष्य संबंधी प्रावधान को समाप्त करने की मांग भी उठाई गई। इसके अलावा रिहंद जलाशय में बढ़ते प्रदूषण की उच्चस्तरीय जांच कराकर इसके लिए जिम्मेदार उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है।
अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर और शिक्षण संस्थान खोलने की मांग
भाकपा ने हाथीनाला से छत्तीसगढ़ सीमा तक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की मांग की है। इसके साथ ही क्षेत्र में सरकारी इंटर कॉलेज, पॉलिटेक्निक और मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग भी मांगपत्र में शामिल है।
पार्टी ने बभनी विकासखंड की ग्राम पंचायत बरवाटोला (क), राजस्व गांव सालेनाग में चार वर्ष पूर्व ध्वस्त हुए प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रिक्त पदों पर स्टाफ नर्स और विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई है।
औद्योगिक संस्थानों के सीएसआर फंड की जांच की मांग
मांगपत्र में एनटीपीसी, एनसीएल, हिंडाल्को और कनोरिया केमिकल्स सहित अन्य औद्योगिक संस्थानों के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) फंड के उपयोग की सार्वजनिक जांच कराने की मांग की गई है। पार्टी का कहना है कि सीएसआर के तहत खर्च होने वाली धनराशि का वास्तविक लाभ परियोजनाओं से प्रभावित गांवों और वहां रहने वाले लोगों तक पहुंचना चाहिए।
देव कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि ये मांगें केवल विस्थापित परिवारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आदिवासियों, किसानों, मजदूरों और बेरोजगार युवाओं के जल, जंगल, जमीन, रोजगार, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन के अधिकार से जुड़ी हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से मांगपत्र में उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई कराने की अपील की।
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