वॉशिंगटन/दमिश्क।
अमेरिका ने आतंकवादी संगठन ISIS के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी जवाबी कार्रवाई करते हुए सीरिया में व्यापक सैन्य अभियान चलाया है। अमेरिकी सेना ने “ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक” के तहत मध्य सीरिया में ISIS के 70 से अधिक आतंकी ठिकानों पर 100 से ज्यादा सटीक बम गिराए।

यह हमला हाल ही में हुए उस आतंकी हमले के जवाब में किया गया है, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों और एक अमेरिकी नागरिक की मौत हो गई थी। पेंटागन के अनुसार यह कार्रवाई ISIS के ठिकानों, हथियार भंडार, कमांड सेंटर और नेतृत्व को निशाना बनाकर की गई।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस सैन्य कार्रवाई को “अमेरिका के लिए बदले की घोषणा” करार देते हुए कहा कि जो भी संगठन अमेरिकी नागरिकों या सैनिकों को निशाना बनाएगा, उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।
वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा,
“अमेरिका पर हमला करने वालों को दुनिया के किसी भी कोने में छोड़ा नहीं जाएगा। हमारी कार्रवाई relentless होगी।”
पेंटागन अधिकारियों का कहना है कि इस हमले का मकसद ISIS की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह पंगु बनाना और उसके शीर्ष नेतृत्व को खत्म करना है। शुरुआती आकलन में कई आतंकी ठिकानों के पूरी तरह तबाह होने की पुष्टि हुई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह हमला न केवल आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका की सख्त नीति को दर्शाता है, बल्कि मध्य पूर्व में बढ़ते सुरक्षा तनाव और अमेरिका की आक्रामक रणनीति का भी संकेत है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह हमला आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका के सख्त नीति को दर्शाता है लेकिन वही अमेरिका जब पाकिस्तान जैसे आतंकवादी के पनाहगारों को मदद करता है तो अमेरिका के दोहरी नीति को उजागर करता है। आतंकवाद कही भी हो आतंकवाद है उसे अलग तरीके से देखने की अमेरिकी नजरिया स्वयं अमेरिका के नीतियों का ही पोल खोलता है। दुनिया भर मे हथियार बेचकर दहशतगर्दी को मदद पहुँचाने वाला अमेरिका पर जब हमला हुआ तो दो दिन भी नही लगाया और हमला कर दिया।



