समाज जागरण रंजीत तिवारी
वाराणसी।
साड़ी कारोबार में साझीदार बनाने के नाम पर एक करोड़ 20 लाख 50 हजार रुपए लेने और बाद में उसमें से 65 लाख रुपए वापस करने और शेष रकम हड़पने के मामले में आरोपित को कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई। अपर जिला जज (पंचम) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने सिविल लाइंस, प्रयागराज निवासी आरोपित उमंग ग्रोवर को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने की दशा में एक-एक लाख रुपए की दो जमानतें एवं बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, संदीप यादव व नितेश सिंह ने पक्ष रखा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार परिवादी पियूष वर्मा ने अदालत में परिवाद दर्ज कराया था। आरोप था कि वर्ष 2015 में उसके मित्र उमंग अपनी पत्नी पूजा ग्रोवर के साथ वाराणसी में एक पार्टी में आया था। बातचीत में उसने बताया कि वह सिविल लाइन्स, इलाहाबाद में बड़ी साड़ी की दुकान का अधिष्ठाता है तथा उसे उसी एरिया में एक दूसरी साडी की दुकान खोलनी है तथा उसके लिए उससे कुछ आर्थिक सहायता चाहिए तथा वह उसके साथ पार्टनर के तौर पर रहेगा व उचित मूल्य लाभांश में से प्रदान करेगा। उसकी बात पर विश्वास करके परिवादी ने उमंग और उसकी पत्नी पूजा ग्रोवर को एक करोड बीस लाख पचास हजार रूपये लोन के माध्यम से तथा अपने माता पिता के द्वारा जमा किये फिक्स् डिपाजिट व मकान आदि बेचकर आरटीजीएस, नेफट व अन्य कैश के माध्यम से विभिन्न तिथियों में दिया। विपक्षीगण द्वारा शुरू में परिवादी को दो लाख रूपये वादे के अनुसार भुगतान किया गया, लेकिन बाद में पैसे देने बंद कर दिए। वर्ष 2018 के बाद विपक्षीगण से बार-बार परिवादी ने निवेदन किया कि उसके द्वारा दिये गये मूलधन को वापस कर दे तथा उस पर दिये जाने वाले दो लाख रुपये व्याज के रूप में वापस कर दे, लेकिन विपक्षीगण ने पैसे देना तो दूर फोन भी उठाना बंद कर दिया। बाद में कुछ अन्य मित्रो द्वारा पंचायत करने के बाद विपक्षी उमंग व परिवादी के मध्य एक सुलहनामा दिनांक 28 दिसंबर 2020 को तहरीर किया जिसमें उमंग ने परिवादी को कुल शेष बचे एक करोड सात लाख रूपये 31 जुलाई 2021 तक भुगतान करने का आश्वासन दिया और परिवादी को केवल 65 लाख रूपये वापस किये। और शेष रकम के बाबत 31 मार्च 2023 को 100 रुपये के स्टाम्प पर लिखकर दिया कि उसके उपर 65 लाख रुपये बकाया है, तथा उमंग ग्रोवर ने प्रतिमाह 65 हजार रूपये परिवादी को इंटरेस्ट के रूप में प्रदान करेगा, जब तक कि वह मूल धन वापस न कर दे। लेकिन उसने पैसे का कोई भुगतान नहीं किया और बेईमानी करते हुए आपराधिक षडयंत्र के तहत उसके पैसे हड़प लिए।
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