नदी से पोकलेन के बाद अब पनडुब्बी से हो रहा उत्खनन
खदान की आड़ में ठेकेदार बनाम खनन माफिया मनमाने तरीके से रेत का उत्खनन कर रहा है। रेत निकालने के लिए पॉकलेन मशीनों के अलावा पनडुब्बी (लिफ्टर) का उपयोग भी किया जा रहा है। पनडुब्बी में लगे पाइप के माध्यम से नदी के अंदर काफी गहराई से भी रेत निकाला जा रहा है। इससे नदी को भी नुकसान पहुंच रहा है। साथ ही नदी में रहने वाले जलीय जीवों को इससे सबसे ज्यादा नुकसान है।
अनूपपुर। सोन नदी में जल भराव वाले स्थान पर जो ठेके में दिये गये भू-खण्ड से भी बाहर है, उस स्थान पर कामर्स एसोसिएट्स नामक ठेका कंपनी के द्वारा पनडुब्बी लगाकर रेत निकाली जा रही है। सोशल मीडिया में मौके की लाईव तस्वीरे खनिज विभाग तक पहुंचने के 24 से 28 घंटे बाद अनूपपुर का खनिज अमला मौके पर पहुंचता है और पनडुब्बी नहीं मिली कि जांच तैयार की जाती है। सोशल मीडिया की लाईव तस्वीरों को लेकर भी ठेकेदार को कोई नोटिस और निकाली गई रेत का जुर्माना जैसी औपचारिकता तक पूरी नहीं की जाती। इस पूरे मामले में प्रभारी खनिज अधिकारी ने कलेक्टर तक को अंधेरे में रखा। जबकि कड़वा सच यह है कि विभाग के जिम्मेदारों ने ठेकेदार का साझेदार बनकर किसी भी खदान की सीमा रेखा तक चिन्हित नहीं करवाई है। सीमा रेखा से बाहर दूर-दूर तक नदी के किनारे अनाधिकृत तौर पर वाहनों के लिए सडक़ बनाई गई है, जो अनूपपुर से लेकर सीतापुर और जमुना कोतमा क्षेत्र तक में स्पष्ट नजर आती है। खनिज विभाग ने कलेक्टर हर्षल पंचोली और माईनिंग कार्पाेरेशन तक को इस मामले में अपने फायदे के लिए गुमराह किया।
पनडुब्बी चालक ने खोली पोल
चचाई में विद्युत मण्डल के कालोनी से सटे क्षेत्र में बीते 4 से 5 महीनों से अवैध रूप से जल भराव व आवंटित भू-खण्ड से परे पनडुब्बी लगाकर रेत निकाली जा रही है, कामर्स एसोसिएट्स के तथाकथित कारिंदे इस क्षेत्र में खनिज संपदा के साथ पॉवर प्लांट और नदी के तके लिए नासूर बन चुके है, खनिज माफिया का साझेदार बन चुका विभाग और उसके कर्मचारियों को भले ही लाईव पनडुब्बी नजर न आई हो, लेकिन पनडुब्बी को चलाने के लिए उत्तरप्रदेश से आये 20-20 हजार मासिक वेतन के 4 कर्मचारियों ने पनडुब्बी को चलाने और प्रतिदिन यहां से 35 से 40 हाईवा नदी के बीच से रेत निकालने की बात को स्वीकारा है। मीडिया को दिये गये बयान में उन्होंने खुद बताया कि चार से पांच महीने से यहां काम कर रहे हैं, आवंटित खदान से 4 से 500 मीटर दूर पनडुब्बी लगाकर जहां रेत निकाली जा रही है, वहां तक ठेकेदार ने सडक़ भी बनाई है, लेकिन आंखो में पट्टी बांधकर धृतराष्ट्र बने खनिज अमले के जिम्मेदारों को सिर्फ कलेक्टर को गुमराह करना और अपनी जेबे भरने से ही मतलब है।
20 मीटर गहराई से
खींच रहे रेत
नियम के मुताबिक नदी के बाहर जमा हुए रेत को खदान के तौर पर ठेके पर दिया जाता है, लेकिन जिले में संचालित खदानों में सीधे नदी से ही रेत निकाला जा रहा है। ऐसे में पॉकलेन मशीन की मदद से पहले रेत को किनारे पर इका किया जाता है फिर ट्रक और डंपरों में भरकर बाहर भेजा जाता है। इनमें कई जगह नदी से पॉकलेन मशीन भी रेत नहीं निकाल पाती है तो ठेकेदार बनाम माफिया नदी की गहराई से रेत निकालने के लिए पनडुब्बी का इस्तेमाल कर रहे हैं। पनडुब्बी के माध्यम से पाइपों से नदी के अंदर करीब 20 मीटर गहराई तक से रेत निकाला जाता है। इस रेत को भी नदी किनारे इका किया जाता है और फिर इन्हें पॉकलेन और जेसीबी की मदद से ट्रक और हाईवा में भरा जाता है।
विभाग-ठेकेदार का गठजोड़
पोकलेन के इस पूरे खेल में प्रभारी खनिज अधिकारी ने ठेकेदार को खुली छूट दे रखी है, ठेकेदार द्वारा तय सीमा और तय मापदण्ड हटकर उत्खनन किया है, लेकिन विभाग के जिम्मेदारों को यह नजर नहीं आ रहा है। अनूपपुर रेत खदानों का अगर भौतिक सत्यापन करवाया जाये तो, ठेकेदार और खनिज विभाग के जिम्मेदारों का गठजोड़ सामने आ सकता है। सोशल मीडिया में वॉयरल हो रहे वीडियो के स्थल पर जाकर संभाग स्तरीय दल गठित कर जांच कराई जाये, जिससे पूरा खुलासा हो सकता है।



