विभाग पहले प्राथमिकता तय करे कि एसआईआर जरूरी है कि निपुण भारत मिशन शैलेन्द्र कुमार सिंह।

समाज जागरण अनिल कुमार
हरहुआ वाराणसी।
महानिदेशक स्कूली शिक्षा उत्तर प्रदेश ने 04 दिसम्बर’25 से डीएलएड प्रशिक्षुओं द्वारा जनपद के 1005 विद्यालयों के बच्चों का निपुण मूल्यांकन करने का आदेश जारी किया है !जबकि प्रत्येक विद्यालय से दो से तीन शिक्षक बी एल ओ कार्य में पहले से ही लगे हुये हैं l
ज्ञातव्य हो कि परिषदीय विद्यालयों के बच्चों का निपुण मूल्यांकन दिसम्बर के पहले सप्ताह से शुरू होकर विभिन्न तिथियों में संपन्न होना है, जिसमें गणित एवं भाषा के 75 फीसद प्रश्नों के जवाब ऑनलाइन देने पर ही छात्र निपुण होगा और तभी विद्यालय निपुण घोषित होंगे ।जबकि निर्वाचान विभाग द्वारा जनपद के सभी विद्यालयों से शिक्षक /शिक्षामित्रों को 15 दिन पहले से एसआईआर के तहत लगाकर घर-घर फॉर्म वितरण करने , कलेक्शन करने , नये मतदाता के नाम जोड़ने तथा हटाने के कार्य में लगाकर दिसम्बर तक का महाअभियान चलाया है,जिससे विद्यालयों में शिक्षण कार्य पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है l
उक्त बातें उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलामंत्री डा0 शैलेन्द्र विक्रम सिंह ने एक प्रेस वार्ता के माध्यम से कहा l
उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा समय -सारिणी तथा पाठ योजना के अनुसारकक्षा-शिक्षण, सप्ताह वार पाठक्रम, निपुण परीक्षण एवं क्रिया आधारित शिक्षण प्रक्रिया लागू किया गया है जो सिद्धांततः बहुत प्रभावी लगता है। किन्तु इसे अमली जामा पहनायेगा कौन? जब शिक्षक विद्यालय में ही नहीं है l
उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग या तो गुमराह है या फिर जानबूझकर शिक्षा के साथ खिलवाड़ करती है! क्योंकि वह प्राथमिकता तय नहीं कर पा रही है कि शिक्षकों के लिए शिक्षण जरुरी है कि गैर शैक्षणिक कार्य?
उन्होंने निपुण भारत मिशन को बेसिक शिक्षा के लिए एक क्रांतिकारी योजना बताते हुये, इसे लागू करने में इच्छा शक्ति की कमी का आरोप लगाते हुये मांग किया कि शासन और विभाग पहले प्राथमिकता तय करे कि शिक्षक को करना क्या है? क्योंकि हमें ऐसे बच्चों के साथ काम करना है जो सिर्फ विद्यालय में ही सीखता है न वह किसी कोचिंग में सीखता है और न ही उसके अभिभावक उसे कुछ सीखाने की स्थिति में हैं फिर शिक्षक के पास ऐसा कौन सा कैप्सूल है कि उसे बिना कक्षा में गये निपुण बना दे l

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