बागेश्वर धाम की सनातन हिंदू एकता पदयात्रा दिल्ली से शुरू — जीरखोद मंदिर पहुंचने पर खुली नगर निगम व नेताओं की पोल

भरी धूप में धूल-मिट्टी और गड्ढों से जूझे श्रद्धालु, अव्यवस्था से नाराज़ हुआ आमजन

रिपोर्ट: रविंद्र आर्य | दिल्ली, 07 नवम्बर 2025

बाबा बागेश्वर धाम सरकार (आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री) की “सनातन हिंदू एकता पदयात्रा” ने आज दिल्ली से आरंभ होकर जीरखोद मंदिर तक का पड़ाव पूरा किया।
यह यात्रा हिंदू जागरण, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के उद्देश्य से निकाली गई है।

अपने संबोधन में बाबा बागेश्वर ने कहा—

“अब भारत का हिंदू न तो डरपोक रहेगा और न ही अत्याचार सहन करेगा। जो लोग हिंदुओं को छेड़ेंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। ‘गजवा-ए-हिंद’ जैसी साजिशों का अंत अब निश्चित है।”

स्थानीय व्यवस्था की पोल खुली — धूल, गोबर और अव्यवस्था में फंसे श्रद्धालु

यात्रा के दौरान एक अत्यंत अवांछनीय और शर्मनाक दृश्य सामने आया। जैसे ही पदयात्रा डेरा गाँव स्थित जीरखोद मंदिर पहुंची, श्रद्धालुओं को उससे पहले रास्ते में भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

स्थानीय नगर निगम पार्षद सुन्दर छतरपुर और सांसद कंवर सिंह तंवर के क्षेत्र में आने के बावजूद पूरे मार्ग की व्यवस्था चरमरा गई थी।

भरी धूप में धूल, मिट्टी और गड्ढों से भरे रास्तों पर महिलाएँ और बच्चे चलने को विवश थे। जगह-जगह पशुओं का गोबर, नालियों का गंदा पानी और उड़ती धूल से वातावरण दूषित हो गया था।
पानी का छिड़काव तक नहीं कराया गया, जिससे दम और सांस संबंधी समस्याओं से पीड़ित श्रद्धालुओं को चलना बेहद मुश्किल हुआ।

जनता और मीडिया ने उठाई आवाज

यात्रियों और स्थानीय नागरिकों ने बताया कि क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से नियमित सफाई नहीं हुई।
जहाँ आज दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता पहुंचीं, वहाँ तक सफाई की गई थी; लेकिन उससे आगे 5 किलोमीटर के क्षेत्र में नगर निगम की भारी लापरवाही उजागर हुई।

केवल बाबा के कार्यक्रम से कुछ दिन पहले थोड़ी-बहुत दिखावटी सफाई कराई गई, जो यात्रा के दिन फिर धूल-मिट्टी में मिल गई।
कई स्थानों पर लाइटें वर्षों बाद चालू की गईं, और एक वृद्ध महिला श्रद्धालु को धूल व गर्मी के कारण एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाना पड़ा।

लोगों ने कहा—

“संत महाराज के आगमन ने क्षेत्र की दशा उजागर कर दी, वरना यह अंधकार वर्षों से ढंका हुआ था।”

नेताओं पर जनता का आक्रोश

स्थानीय जनता का कहना है कि यह स्थिति किसी सामान्य प्रशासनिक त्रुटि की नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई लापरवाही का परिणाम है।
निगम के संरक्षण में रहते हुए भी छतरपुर और आसपास के क्षेत्रों की स्थिति यह दर्शाती है कि धर्म और समाज के लिए समर्पित संत के कार्यक्रमों को भी स्थानीय राजनीति की उपेक्षा झेलनी पड़ रही है।

लोगों का मानना है कि इससे न केवल यात्रा की गरिमा प्रभावित हुई, बल्कि बाबा बागेश्वर धाम सरकार की छवि को ठेस पहुंचाने का प्रयास भी हुआ है।

“सनातन हिंदू एकता यात्रा” का उद्देश्य जहां देशभर में एकता, धर्म और राष्ट्रभक्ति का संदेश देना था, वहीं दिल्ली के इस हिस्से में उसने राजनीतिक उदासीनता और प्रशासनिक लापरवाही की असल तस्वीर उजागर कर दी।

अब जनता को उम्मीद है कि बाबा के आशीर्वाद और मीडिया की आवाज से क्षेत्र की दशा में वास्तविक सुधार होगा।

“जब धर्म चले जागरण की राह, तब अंधकार खुद मिटता है — सनातन की पदयात्रा केवल यात्रा नहीं, चेतना का पुनर्जागरण है।”

लेखक: रविंद्र आर्य

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