नदी पर पुल नहीं सड़क बेकार आदिवासी गांवों में आक्रोश, मरीजों को खटिया पर ढोने की मजबूरी

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
ठाकुरगंज। समाज जागरण ब्यूरो
ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत सखुआडाली पंचायत में बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। पंचायत के वार्ड संख्या 3, 12 एवं 13 के अंतर्गत आने वाले नमुभीट्टा, कटहलडांगी, झकवाटोली, दहिभाषा, बथान गांव और होटकपाड़ा सहित अन्य आदिवासी बहुल गांवों को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर नदी में पुल का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।


शनिवार को पैक्स चेयरमेन प्रत्याशी मोहम्मद नासिर आलम की अध्यक्षता में ग्रामीणों की एक बैठक आयोजित कर इस गंभीर समस्या पर चर्चा की गई। बैठक में ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि वर्षों की मांग के बाद क्षेत्र में सड़क का निर्माण तो हुआ, लेकिन नदी पर पुल नहीं बनने से सड़क का कोई व्यावहारिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।


बैठक को संबोधित करते हुए नासिर आलम ने कहा कि नमुभीट्टा और कटहलडांगी गांव में लगभग 500 आदिवासी परिवार निवास करते हैं, जिनका आवागमन पूरी तरह इसी मार्ग पर निर्भर है। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ते ही यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है, जिससे ग्रामीणों का ठाकुरगंज प्रखंड मुख्यालय और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क टूट जाता है।
ग्रामीणों ने बताया कि आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। पुल नहीं होने के कारण मरीजों को खटिया पर लादकर नदी पार करानी पड़ती है। कई बार रास्ते में ही मरीज की हालत गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में कई गर्भवती महिलाओं की समय पर इलाज नहीं मिलने से मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं, किसी की मृत्यु होने पर शव को अंतिम संस्कार के लिए भी खटिया पर ले जाना पड़ता है, जो मानवीय गरिमा के विरुद्ध है।


ग्रामीणों ने कहा कि यह समस्या केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि कई आदिवासी बहुल गांवों की जिंदगी इस एक पुल के अभाव में ठहर सी गई है। बच्चों की पढ़ाई, बीमारों का इलाज, रोजगार और सामाजिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। बरसात के दिनों में स्कूली बच्चे कई-कई दिनों तक घरों में कैद रहने को मजबूर हो जाते हैं।
नासिर आलम ने बताया कि इस गंभीर मुद्दे को लेकर पूर्व में स्थानीय विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल एवं किशनगंज जिला पदाधिकारी विशाल राज को ज्ञापन सौंपा जा चुका है, जिसमें नदी पर अविलंब स्थायी पुल निर्माण की मांग की गई थी। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी और निराशा बढ़ती जा रही है।


बैठक में ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र पुल निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे चरणबद्ध आंदोलन करने को बाध्य होंगे। आवश्यकता पड़ने पर प्रखंड कार्यालय और जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन भी किया जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार “हर घर तक सड़क” और “बेहतर स्वास्थ्य सुविधा” के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। सड़क का निर्माण पुल के बिना केवल कागजी उपलब्धि बनकर रह गया है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि समस्या की गंभीरता को समझते हुए तत्काल स्थल निरीक्षण कर पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए। समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की होगी।

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