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आदि गंगे पुनपुन नदी के अस्तित्व पर संकट

दैनिक समाज जागरण अनील कुमार संवाददाता नबीनगर (औरंगाबाद)

नबीनगर (बिहार) 15 अप्रैल 2024 नबीनगर मे पुनपुन नदी आज अपने अस्तित्व पर आंसू बहा रही है।वही आदि गंगे के नाम से मशहूर पुनपुन नदी नबीनगर मे एक नाला के रूप मे रह गई है।अस्पताल के एवम होटलों के गंदा पानी के साथ साथ साथ घरों के गंदा पानी पुनपुन नदी में गिरती है जिसके कारण आज पुनपुन नदी का अस्तित्व मिटता जा रहा है और यह नदी सिर्फ वर्षाती नदी के रूप मे रह गई है।गौरतलब है कि पुनपुन नदी का उद्गम स्थल नबीनगर प्रखंड के टंडवा पंचायत के झारखंड बॉर्डर के समीप कुंड नामक स्थान पर है जहां से नदी निकलकर पटना के पास गंगा नदी मे मिलती है। पुनपुन नदी का बड़ा ही धार्मिक महत्व है हिंदू धर्म के अनुसार अपने पित्तरों को मोक्ष प्राप्ति के लिए लोग गया श्राद्ध करते है लेकिन गया श्राद्ध से पूर्व प्रथम पिण्ड पुनपुन नदी मे ही किया जाता है।वही पुनपुन नदी नबीनगर मे अतिक्रमण का भी शिकार है। बहुत से लोगों द्वारा नदी का अतिक्रमण कर दुकान और घर बना दिया गया है लेकिन इस ओर न तो कोई अधिकारी का ध्यान है, न ही राजनीतिक दलों का और न ही जन प्रतिनिधियों का ध्यान है।कभी कभार चुनाव के समय या फिर किसी कार्यक्रम के दौरान जब इस ओर नेताओं को ध्यान आकृष्ट कराया जाता है तब सिर्फ एक आश्वासन मिलकर रह जाता है।पुनपुन नदी के धार्मिक महत्व और इसके संरक्षण को लेकर विगत कई वर्षों से पुनपुन महोत्सव का भी आयोजन किया जा रहा है फिर भी आज पुनपुन नदी अपनी पहचान के लिए तरस रही है।स्थिति ऐसी है कि विभिन्न धार्मिक आयोजन मे कलश मे जलभरी एवम कलश विसर्जन और मूर्ती विसर्जन के लिये नदी मे पानी नहीं है जहां कलश मे शुद्ध जल ले सके और मूर्ति को नदी मे विसर्जित किया जा सके।


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