google-site-verification: google2b21991adbe5cec3.html

Bihar Nawada: महाजन के कर्ज से परेशान एक ही परिवार के छह लोगों ने खाया जहर, सभी की मौत

रीता कुमारी, ब्यूरो चीफ, दैनिक समाज जागरण

नवादा( बिहार)। नगर थाना क्षेत्र के न्यु एरिया मोहल्ले में कर्ज वसूली की प्रताड़ना से परेशान होकर पूरे परिवार ने जहर खा लिया। सूचना मिलते ही पूरे इलाके में सनसनी फ़ैल गयी। स्थानीय लोगों ने सभी को अस्पताल में भर्ती कराया जहां इलाज के दौरान सभी छह लोगों की मौत हो गयी। मरनेवालों में 50 वर्षीय केदार लाल गुप्ता, उनकी 47 वर्षीया पत्नी अनिता कुमारी, 20 वर्षीया पुत्री गुड़िया कुमारी ,18 वर्षीया पुत्री साक्षी कुमारी , 17 वर्षीय पुत्र प्रिंस कुमार ने और 19 वर्षीया पुत्री शबनम कुमारी शामिल हैं।

मूल रूप से रजौली थानाक्षेत्र के अमांवा निवासी पीड़ित परिवार पिछले बीस वर्षों से नगर थानाक्षेत्र के न्यू एरिया मोहल्ले के कपासी कोठी में किराये पर रह रहा था और नवादा शहर में फल की दुकान चला जीवनयापन करता था।गुप्ता परिवार कर्ज से परेशान था। आये दिन कर्ज वसूली के लिए उनसे अभद्रता की जा रही थी जिससे परेशान हो इस परिवार ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने इस मामले में दो को गिरफ्तार किया है।

सामूहिक आत्महत्या से सकते में जिलावासी, बड़े भाई ने कहा कर्ज बन गया जिन्दगी का हिस्सा

रीता कुमारी, ब्यूरो चीफ, दैनिक समाज जागरण

नवादा(बिहार)। नगर में सामूहिक आत्महत्या की घटना से जिलावासी सकते में हैं। जिले में इस प्रकार की यह पहली घटना है। जो भी सुना, स्तब्ध रह गया। किसी को इसपर सहसा विश्वास नहीं हो पा रहा था। कर्ज के चलते पूरे परिवार को इस प्रकार का कदम उठाने के लिए मजबूर होने की इस घटना की चर्चा हर किसी की जुबान पर है।
न्यू एरिया मोहल्ले में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। मोहल्ले के लोग इस घटना को आसानी से पचा नहीं पा रहे हैं।
दो साल पहले मृतक केदार लाल गुप्ता के चाट स्टॉल पर काम करनेवाले संटू कुमार ने बताया कि वो लोग काफी अच्छे थे। काम करने के दौरान कभी-कभी केदार डांट देते थे। लेकिन कुछ देर बाद अपनी परेशानी बताकर प्यार से बात करते थे। मुहल्ले के कैलाश विश्वकर्मा बताते हैं कि घटना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। देख-जानकर मन विचलित हो गया है।

जिंदगी का हिस्सा बन गया है कर्ज

मृतक केदार के बड़े भाई शम्भुनाथ ने बताया कि भतीजा अमित से घटना की जानकारी मिली। दुख को बयान नहीं किया जा सकता है। कर्ज तो जिन्दगी का हिस्सा बन गया है। कर्ज लेकर ही जिन्दगी जीने की विवशता है। छोटा भाई केदार काफी संघर्ष कर अपने परिवार की परवरिश कर रहा था।

खत्म हो गया हंसता-खेलता परिवार

दो साल पहले केदार चाट का स्टॉल लगाते थे। पुत्र अमित और प्रिंस सहयोग करते थे। वहीं पत्नी अनिता देवी, पुत्री शबनम कुमारी, गुड़िया कुमारी और साक्षी घर में कच्चा मेटेरियल तैयार करने में मदद करती थी। फिर केदार फल की दुकान चलाने लगे, जिसमें पूरा परिवार मदद करता था। अब यह परिवार पूरी तरह खत्म हो गया। दिल्ली में रहने के चलते बड़ा बेटा अमित जीवित है। वहीं बेटी साक्षी पावापुरी के विम्स में जिंदगी-मौत के बीच जंग लड़ रही थी, लेकिन अचानक 14 घंटा के बाद साक्षी की भी मौत हो गयी। दो अन्य शादीशुदा बेटियां ससुराल में रहती हैं।

परिवार संग आत्महत्या से पहले केदार ने लिखा मार्मिक सुसाइड नोट, कर्ज देनेवाले को बताया देश और समाज का दीमक

रीता कुमारी, ब्यूरो चीफ, दैनिक समाज जागरण

नवादा (बिहार)। जिले में कर्ज के चलते आत्महत्या करनेवाले परिवार के मुखिया ने मार्मिक सुसाइड नोट लिखा है। पुलिस के हाथ लगे सुसाइड नोट में परिवार के मुखिया ने अपनी परेशानी का जिक्र करते हुए महाजनों की प्रताड़ना की चर्चा की है। दो पन्नों के नोट में कर्ज देनेवाले छह लोगों के नाम का जिक्र करते हुए उन्हें देश-समाज का दीमक बताया गया है। कहा गया है कि ऐसे लोग पूरे देश को दीमक की तरह चाटकर बर्बाद कर रहे हैं।

घटना के एक दिन पहले लिखा सुसाइड नोट, महाजनों के नाम का खुलासा

परिवार के मुखिया केदार ने 8 नवम्बर को यह सुसाइड नोट लिखा है, जो घटना के एक दिन पहले का है। नोट में केदार ने लिखा है कि उन्होंने कुछ लोगों से कर्ज लिया था। जिसमें छह महाजन लगातार परेशान कर रहे हैं। शहर के न्यू एरिया मोहल्ले के मनीष सिंह, विकास सिंह, विजय सिंह, टुनटुन सिंह खटाल, डॉ. पंकज सिन्हा और गढ़पर मोहल्ला के रणजीत सिंह से उन्होंने कर्ज लिया था।

कर्ज का दोगुना-तिगुना ब्याज कर चुके थे जमा

सुसाइड नोट में लिखा है कि पांच-छह साल से महाजन कर्ज को लेकर परेशान कर रहे थे। कर्ज का दोगुना-तिगुना ब्याज जमा कर चुके थे, फिर भी कर्ज खत्म नहीं हुआ।

कर्ज चुकता करने को मांग रहे थे मोहलत

सुसाइड नोट में जिक्र है कि कर्ज चुकता करने के लिए महाजनों से मोहलत मांग रहे थे। साल-छह महीने का वक्त मांग रहे थे, लेकिन कर्ज देनेवाले कुछ भी सुनने-समझने को तैयार नहीं थे। पिछले पांच-छह सालों से लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। ब्याज नहीं देने की स्थिति में गाली-गलौज करते थे। विवश होकर यह गलत कदम उठाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी लिखा कि कर्ज देनेवाले समाज का कीड़ा है, जो समाज को बर्बाद कर रहे हैं। कर्ज देनेवाले छहों ने कई लोगों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। ऐसे दीमकों पर अंकुश लगाने की जरूरत है।


Discover more from समाज जागरण

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

🛍️ Today’s Best Deals

(Advertisement)