दैनिक समाज जागरण 28.07.2026 चांद कुमार लायेक (ब्यूरो चीफ) पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर
जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा प्रखंड अंतर्गत ओड़िया पंचायत के ग्रामीणों ने ओड़िया मौजा में संचालित एवं प्रस्तावित पत्थर खदान के खिलाफ मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में ग्रामीण पारंपरिक हथियारों के साथ जिला मुख्यालय पहुंचे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल खनन कार्य पर रोक लगाने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि ओड़िया मौजा के लायाडीह, चिरूडीह और ओड़िया टोला क्षेत्र में खाता संख्या 624 के प्लॉट संख्या 4546 की लगभग 10 एकड़ तथा प्लॉट संख्या 988 की 8 एकड़ भूमि के विरुद्ध पिछले करीब 20 वर्षों से निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक क्षेत्र में अवैध पत्थर खनन किया जा रहा है। उनका कहना है कि नियमों की अनदेखी कर किए जा रहे खनन से पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंच रही है और ग्रामीणों का जीवन भी प्रभावित हो रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि खदान के आसपास विद्यालय, आवासीय मकान और धार्मिक आस्था का केंद्र गौराम थान स्थित है। इसके अलावा लायाडीह गांव के बीच से 11 हजार वोल्ट की उच्च क्षमता वाली विद्युत लाइन गुजरती है। ऐसे में खनन के दौरान होने वाली ब्लास्टिंग से किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामसभा की सहमति लिए बिना ही खदान संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, जो ग्रामीणों के अधिकारों का उल्लंघन है।
ग्रामीणों ने कहा कि लगातार होने वाली ब्लास्टिंग, उड़ती धूल और बढ़ते प्रदूषण के कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कई लोगों को सांस संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कृषि भूमि की उर्वरता घट रही है और पेयजल स्रोत भी प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आने वाले दिनों में पर्यावरणीय संतुलन और ग्रामीणों की आजीविका दोनों पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि जनहित और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए प्रस्तावित पत्थर खदान की स्वीकृति पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध खनन में संलिप्त लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो वे चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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