दैनिक समाज जागरण
राकेश कुमार मिश्रा ब्यूरो चीफ गया
गया (बिहार) 14 वें बौद्ध धर्म गुरु पावन दलाई लामा आज 88 वर्ष के हो गए हैं, इनके जन्म दिवस के अवसर पर गया का बोध गया में हर्षोल्लास के साथ इनका जन्म दिवस मनाया गया और 50 पोंड का केक काटा गया,इस मौके पर कई देशों के बौद्ध भिक्षु मौजूद रहे, गुरुवार के सुबह बोधगया में शोभा यात्रा निकाली गई, उसके बाद हजारों बौद्ध भिक्षु बोधगया महाबोधि मंदिर में पूजा अर्चना कर पावन दलाई लामा के लंबी उम्र की कामना की गई, 14वें दलाई लामा तेंजिन ग्यात्सो का जन्म 6 जुलाई 1935 को उत्तर-पूर्वी तिब्बत के ताकस्तेर में हुआ था. दलाईलामा 6 दशक से भारत के अतिथि हैं, दलाई लामा का जन्मदिन तिब्बती समुदाय के सबसे भव्य आयोजनों में से एक होता है. गौरतलब है कि कोरोना महामारी के चलते दलाई लामा ने बीते साल दो वर्षों के बाद लोगों के साथ जन्मदिन मनाया था! कोरोना काल में वह करीब दो साल तक अपने आवास पर ही रहे थे. इस दौरान लोगों से मिलना-जुलना भी बंद रहा, इस वर्ष बोधगया में अंतरराष्ट्रीय बुद्धिस्ट काउंसिल के द्वारा पावन दलाई लामा के जन्मोत्सव को भव्य तरीके से मनाया गया और कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किया गया. दलाई लामा तिब्बतियों पर हो अत्याचार के दौरान 15 दिनों का कठिन सफर पूरा करके 31 मार्च, 1959 को भारत आए थे, तभी से वह तिब्बत की संप्रभुता के संघर्ष कर रहे हैं, वर्तमान में वो हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित मैक्लोडगंज में रहते हैं. दुनियाभर के लोग इन्हें कई रूपों में देखते हैं कोई इन्हें शिक्षक तो कोई करूणा का प्रतीक मानता है. दलाई लामा को 1989 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है,अंतरराष्ट्रीय बुद्धिस्ट काउंसिल के अध्यक्ष नवांग तेजिंग ग्यात्सो ने बताया कि पावन दलाई लामा का जन्म दिवस पूरे विश्व में मनाया जा रहा है लेकिन भगवान बुद्ध की नगरी बोधगया में दलाई लामा का बर्थडे मनाना एक उत्सव जैसा है!बोधगया को ज्ञान की धरती कहीं जाती है और यहां भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, उन्होंने बताया कि पावन दलाई लामा बोधगया के लोगों को काफी प्यार देते हैं और यही वजह है कि हर साल उनका यहां आगमन होता है और उनके टीचिंग को सुनने पूरे विश्व के लाखों बौद्ध श्रद्धालु बोधगया पहुंचते हैं!
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