प्याऊ या भ्रष्टाचार का अड्डा? रेलवे स्टेशन चौराहे पर प्यासे राहगीरों के साथ छलावा

अनूपपुर। भीषण गर्मी में आम नागरिकों, मजदूरों और राहगीरों को राहत देने के नाम पर रेलवे स्टेशन चौराहा स्थित नगर पालिका द्वारा बड़े प्रचार-प्रसार और दिखावे के साथ लगाए गए मिट्टी के घड़ों वाले प्याऊ की हकीकत अब सवालों के घेरे में आ गई है। जिस प्याऊ का उद्घाटन मानव सेवा और जनहित के नाम पर किया गया, वहीं बुधवार को वहां पहुंचने वाले लोगों को एक बूंद पानी तक नसीब नहीं हुआ।


स्थानीय लोगों के अनुसार प्याऊ स्थल पर रखे गए सभी मिट्टी के घड़े खाली पड़े थे, घड़ों के ढक्कन खुले हुए थे और पानी पिलाने के लिए मानदेय पर नियुक्त कर्मचारी मौके से गायब मिला। तेज धूप और गर्मी में जब राहगीर पानी की आस लेकर पहुंचे तो उन्हें निराशा हाथ लगी।


सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब नगर पालिका द्वारा बाकायदा कर्मचारी नियुक्त करने और नियमित पानी भरवाने का दावा किया गया था, तो फिर यह लापरवाही क्यों? क्या यह केवल फोटो खिंचवाने और कागजी खानापूर्ति तक सीमित व्यवस्था थी?


नागरिकों ने आरोप लगाया कि गरीब मजदूरों और यात्रियों की प्यास को भी अब भ्रष्टाचार का माध्यम बना दिया गया है। सरकारी धन से घड़े खरीदे गए, कर्मचारी की व्यवस्था दिखाई गई, लेकिन जमीनी हकीकत पूरी तरह शून्य नजर आई। लोगों का कहना है कि यदि प्याऊ में पानी ही नहीं रहेगा तो फिर ऐसी व्यवस्था का औचित्य क्या है?


स्थानीय जनों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह सार्वजनिक किया जाए कि प्याऊ संचालन के नाम पर कितना खर्च किया गया तथा जिम्मेदार कर्मचारी और अधिकारी कौन हैं।
भीषण गर्मी में प्यासे लोगों को राहत देने की बजाय यदि व्यवस्थाएं केवल दिखावा बनकर रह जाएं, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि संवेदनहीनता भी मानी जाएगी। अब देखना यह है कि नगर पालिका इस मामले में जवाबदेही तय करती है या फिर यह मामला भी अन्य व्यवस्थाओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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