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सूफी संत सैयद सुल्तान शाह के उर्स में उमड़ा आस्था का सैलाब, 113 चादर पेश कर मांगी मन्नत

समाज जागरण
गोड्डा

बसंतराय के सीमावर्ती क्षेत्र के सुप्रसिद्ध सूफी संत हजरत सैयद सुल्तान शाह रहमतुल्ला अलैह के उर्स के मौका पर हजारों अकीदतमंदों ने दरगाह पर पहुंचकर चादरपोशी की और फातिहा पढ़कर अपनी हाजिरी पेश की। श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा और अकीदत के साथ चादर चढ़ाई तथा अमन ,शांति की दुआ मांगी। इस वर्ष अकीदतमंदों द्वारा कुल 113 चादर पेश कर मन्नत मांगी गई। उर्स के अवसर पर पूरे धार्मिक विधि विधान और इस्लामी परंपराओं के साथ चादरपोशी के रस्म अदा की गई ।बताया जाता है कि हज़रत सैयद सुल्तान शाह रहमतुल्लाह अलैह संभवतः 17वीं सदी के महान सूफी संत थे।

मान्यता है कि 6 भाइयों में से एक थे और सभी अपने समय के प्रतिष्ठित सूफी संत माने जाते थे। उनके अन्य भाइयों की दरगाह भी विभिन्न स्थानों पर स्थित है- भागलपुर के बिहीपुर में दाता मांगन शाह, बसंत राय प्रखंड के शाहपुर में शाह सगुना पीर ,धोरैया प्रखंड के फतुचक चक में सैयद फतेह अली, धोरैया के ही करारिया गांव में एक भाई का मजार है तथा झारखंड के दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड में एक अन्य भाई की मजार बताई जाती है।

कार्यक्रम के दौरान इशा और तरावीह की नमाज के बाद चादर को पूरे गांव में घुमाया गया जिसके बाद दरगाह पर चादरपोशी के मुख्य रस्म अदा की गई इस अवसर पर जामा मस्जिद के इमाम ने सीमावर्ती क्षेत्र सहित देश और दुनिया में अमन, शांति और भाईचारे की काइम रहने की दुआ कराया। उर्स के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु ,स्थानीय लोग और आसपास के गांव से आए अकीदतमंद मौजूद रहे।


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