समाज जागरण दैनिक
विश्व नाथ त्रिपाठी
प्रतापगढ़। अपर जिलाधिकारी (वि0/रा0)/मुख्य कार्यपालक अधिकारी जिला आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण त्रिभुवन विश्वकर्मा ने बताया है कि मौसम विभाग (आई0एम0डी0) लखनऊ ने प्रदेश के कतिपय जिलो में आगामी कुछ दिवसों में वर्षा/अतिवृष्टि/वज्रपात/आकाशीय बिजली की सम्भावना व्यक्त किया है, इन चिन्हित जिलों में जनपद प्रतापगढ़ भी कुछ दिनों के लिये ओरेन्ज/कुछ दिनों के लिये येलो जोन में है जैसा कि वर्तमान में जनपद में वर्षा के साथ वज्रपात (लाइटनिंग) हो रही है। उन्होने भारी वर्षा/अतिवृष्टि/वज्रपात/आकाशीय बिजली से बचाव हेतु ‘‘क्या करें क्या न करें’’ के सम्बन्ध में एडवाइजरी जारी करते हुये बताया है कि आंधी-तूफान और भारी वर्षा के दौरान ऊॅची इमारतों, पेड़ो, मनुष्यों, जानवरों आदि पर बिजली गिरने की घटनायें होती रहती है जिससे जान माल का नुकसान होता है। सावधानी और तैयारी ही एकमात्र तरीका है जिसके द्वारा वज्रपात के खतरे को कम किया जा सकता है या उसके प्रभाव से बचा जा सकता है। उन्होने एडवाइजरी जारी करते हुये बताया है कि यदि आप खुले में हो तो शीघ्रातिशीघ्र किसी पक्के मकान में शरण लें। सफर के दौरान अपने वाहन में ही बने रहे। खिड़कियों, दरवाजे, बरामदे एवं छत से दूर रहे। ऐसी वस्तुयें जो बिजली की सुचालक है उनसे दूर रहे। बिजली के उपकरणों या तार के साथ सम्पर्क से बचे व बिजली के उपकरणों को बिजली के सम्पर्क से हटा दें। तालाब और जलाशयों से भी दूरी बनाये रखें। समूह में न खड़े हो, बल्कि अलग-अलग खड़े रहे। यदि आप जंगल में हो तो बोने एवं घने पेड़ों के शरण में चले जाये। बाहर रहने पर धातु से बनी वस्तुओं का उपयोग न करें। बाइक, बिजली या टेलीफोन का खम्भा, तार की बाड़, मशीन आदि से दूर रहे। धातु से बने कृषि यंत्र डंडा आदि से अपने को दूर कर दें। आसमानी बिजली के झटके से घायल होने पर पीड़ित व्यक्ति को तत्काल नजदीकी प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र ले जाने की व्यवस्था की जानी चाहिये। स्थानीय रेडियो अन्य संचार साधनों से मौसम की जानकारी प्राप्त करते रहे। उन्होने बताया है कि यदि आप खेत खलिहान में काम कर रहे हो और किसी सुरक्षित स्थान की शरण न ले पाये हो तो जहां है हो सके तो पैरों के नीचे सूखी चीजें से जैसे-लकड़ी, प्लास्टिक, बोरा या सूखे पत्ते रख लें, दोनो पैरों को आपस में सटा लें एवं दोनो हाथों से कानों को बंद कर अपने सिर को जमीन की तरफ यथा सम्भव शरीर को झुका लेंं तथा सिर को जमीन से न सटाये। जमीन पर कदापि न लेटे, ऊंचे इमारत वाले क्षेत्रों में शरण नही लें, साथ ही बिजली एवं टेलीफोन के खम्भों के नीचे कदापि शरण नहीं ले, क्योंकि ऊॅचे वृक्ष, ऊंची इमारते एवं टेलीफोन/बिजली के खम्भे आसमानी बिजली को अपनी ओर आकर्षित करते है। पैदल जा रहे हो तो धातु की डंडी वाले छातों का उपयोग न करें, यदि घर में हो तो पानी का नल, फ्रिज, टेलीफोन आदि को न छुये। वज्रपात के मामले में मृत्यु का तत्कालिक कारण हृदयाघात है। अगर जरूरी हो तो संजीवन क्रिया, प्राथमिक चिकित्सा प्रारम्भ कर दें। संजीवन क्रिया, प्राथमिक चिकित्सा देने से पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि प्रभावित व्यक्ति के शरीर से विद्युत का प्रभाव न हो रहा हो। यह सुनिश्चित कर लें कि पीड़ित की नाड़ी एवं श्वास चल रही हो। उन्होने बताया है कि वज्रपात के बाद घर के अंदर तब तक रहें जब तक कि आसमान साफ न हो जाये। स्थानीय प्रशासन को क्षति और मृत्यु की जानकारी दें। अगर कोई व्यक्ति वज्रपात की चपेट में आ गया है तो तुरन्त 112 पर कॉल करें और यथाशीघ्र पीड़ित को अस्पताल ले जाये।
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