सैकड़ों ग्रामीणों ने अंचल अधिकारी के बाद डीएम से लगाई गुहार, चरागाह की जमीन पर खेती-मकान निर्माण और चाय बागान की बाउंड्री में करंट प्रवाहित करने की शिकायत
वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।
ठाकुरगंज प्रखंड के भोलमारा पंचायत अंतर्गत मौजा भोलमारा में बिहार सरकार की लगभग 50 एकड़ जमीन पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। सरकारी जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीणों ने पहले अंचल अधिकारी, ठाकुरगंज को आवेदन दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि आवेदन सौंपने के 22 दिन बाद भी स्थल जांच नहीं की गई। कार्रवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने अब जिला पदाधिकारी किशनगंज को आवेदन देकर मामले में हस्तक्षेप करने और सरकारी जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, 17 सितंबर 2026 को अंचल अधिकारी को आवेदन देकर मामले की जांच कराने की मांग की गई थी। आरोप है कि मौजा भोलमारा, थाना संख्या 245, चादर संख्या 04 एवं 05 में स्थित करीब 50 एकड़ जमीन के बड़े हिस्से पर पिछले तीन वर्षों से कथित रूप से कब्जा किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बावजूद अब तक स्थल निरीक्षण नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सैकड़ों ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी जांच की पहल क्यों नहीं हुई?
ग्रामीणों के मुताबिक, संबंधित जमीन का उपयोग लंबे समय से आसपास के लोग अपने मवेशियों को चराने के लिए करते रहे हैं। आरोप है कि जमीन के अलग-अलग हिस्सों में आम, केला, हल्दी और मक्का की खेती की जा रही है। कुछ हिस्सों में मकान निर्माण किए जाने की भी शिकायत है। ग्रामीणों का दावा है कि इससे पारंपरिक चरागाह का क्षेत्र सिमट रहा है और पशुपालकों को मवेशी चराने में परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जमीन की राजस्व प्रकृति और सरकारी नक्शे की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित भूमि चरागाह के रूप में दर्ज है या नहीं। यदि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि जमीन के कुछ हिस्सों में मक्का की खेती के लिए बाहरी लोगों को कथित तौर पर 16 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से जमीन दी जाती है। इसके अलावा, कुछ हिस्सों की बंदोबस्ती को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों ने राजस्व अभिलेखों, सरकारी नक्शे, जमाबंदी और बंदोबस्ती से संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है, ताकि भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
ग्रामीणों ने चाय बागान की बाउंड्री में बिजली का करंट प्रवाहित किए जाने की शिकायत भी की है। यदि इसकी पुष्टि होती है, तो यह लोगों और मवेशियों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला हो सकता है। हालांकि, इस शिकायत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन से इसकी जांच कर सुरक्षा संबंधी आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है।
सैकड़ों ग्रामीणों की ओर से अंचल अधिकारी के बाद जिला पदाधिकारी को आवेदन देना मामले की गंभीरता को दर्शाता है। ग्रामीणों ने संबंधित जमीन का तत्काल स्थल निरीक्षण कराने, राजस्व अभिलेखों का सत्यापन करने और कथित अतिक्रमण की पुष्टि होने पर नियमानुसार जमीन को मुक्त कराने की मांग की है।
सरकारी जमीन की सुरक्षा और सार्वजनिक उपयोग से जुड़ी शिकायत पर समयबद्ध जांच जरूरी है। यदि आवेदन मिलने के 22 दिन बाद भी स्थल निरीक्षण नहीं हुआ है, तो प्रशासन को जांच में देरी का कारण स्पष्ट करना चाहिए। ग्रामीणों का सवाल है कि सरकारी जमीन से जुड़ी शिकायत पर कार्रवाई के लिए उन्हें अंचल कार्यालय से जिला पदाधिकारी तक गुहार क्यों लगानी पड़ रही हैं?
मामले में अंचल प्रशासन का पक्ष जानने के लिए ठाकुरगंज के अंचल अधिकारी को फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इस कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। जमीन के वास्तविक रकबे, उसकी राजस्व प्रकृति, बंदोबस्ती की वैधता और कथित अतिक्रमण की पुष्टि राजस्व अभिलेखों की जांच तथा स्थल निरीक्षण के बाद ही हो सकेगी। अब देखना है कि जिला प्रशासन ग्रामीणों की शिकायत पर कब तक जांच कराता है और सरकारी जमीन की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए क्या कदम उठाता है।
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