हमास और इजराल की लड़ाई से क्रुड आयल महंगा होने की आसार

शनिवार को इजराइल पर हमले के बाद से ऑयल की कीमत करीब 4 फीसदी उछल चुकी है। सोने और चांदी में करीब एक फीसदी की तेजी है। इक्विटी मार्केट्स में भी डर का माहौल है। यह स्वाभाविक है। इस बीच, OPEC ने एक बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि ऑयल का अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध है। उसने यह भी कहा है कि अगर दुनिया में ऑयल की कमी होती है तो OPEC रिजर्व का इस्तेमाल करेगा। इससे मार्केट की चिंता दूर होगी। लेकि यह कितना सही निकलता है यह तो आने वाली समय ही बतायेगा फिलहाल 4 फिसदी की उछाल होने के लिए चिंता सताने लगी है।

बाजार मे आयल के बढते घटते कीमत से कई देशों के बजट बनते बिगड़ते रहते है। तेल की कीमत कब बढ़ेगा या कब घटेगा यह अंदाजा लगाना मुश्किल है। विशेषज्ञों का मानना है कि आयल के कीमत पर कई चीजों को असर पड़ता है। इनमें डिमांड एंड सप्लाई की स्थिति, जियोपॉलिटक्स, स्पेकुलेशन और टेरर मुख्य है। अगर हम इसके मार्केट के बारे मे बात करे तो फॉरेक्स एक्सचेंज दुनिया के सबसे बड़ा मार्केट है। उसके बाद मे कमोडिटी के मार्केट का नंबर आता है। तीसरे पायदान पर बांडस और सबसे अंतिम पायदान पर इक्विटी मार्केट है। ये सभी मार्केटस आपस मे कनेक्टेड है।

अगर बाजार मे क्रुड आयल महंगा होता है तो इसका असर महंगाई बढ़ाने से लेकर उत्पादन तक पड़ता है।

इजराय की हिंसा की शुरुआत 1973 मे हुए योम किपुर की युद्ध की 50वीं वर्षगांठ के दिन शुरू हुई। हमास के हमलों मे हुई नुकसान के साथ ही विशेषज्ञ इस बात को लेकर चर्चा करने मे लगे है कि ऑयल की कीमतो पर इसका क्या असर पड़ेगा। दरअसल ऑयल की बढी कीमतो का असर इन्फलेशन, मैन्युफेक्चरिंग यहा तक की फूड की कीमतो पर भी पड़ता है। वही हमास के इस दावे को लेकर भी बाजार मे उथल-पुथल है जिसमें उसने दावा किया है कि उसको ईरान का समर्थन हासिल है। हालॉकि ईरान ने कहा है कि हम समर्थन करते है हमास का लेकिन इस हमले से उसका कोई लेना देना नही है। इधर इस बात पर भी चर्चा है की इजराइल के प्रधानमंत्री, लिकुड पार्टी के प्रमुख बैंजामिन नेतान्याहू ईरान का धूर विरोधी माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानाना है की अगर इजराइल का यह लड़ाई हमास और हिजबुल्ला तक ही सीमित रहता है तो इन्वेस्टमेंट सेंटिमेंट का होने वाला नुकसान भी अस्थायी और सीमित होगा। अगर इजराइल ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल देता है तो लड़ाई बड़ी होगी और इसमे दूसरे देश भी शामिल होंगे जिसका व्यापक असर ऑयल मार्केट पर पड़ेगा।

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