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इज़राइल-ईरान तनाव पर पूर्व राजदूत डैनियल कारमोन का बयान, बोले— “दुनिया मूकदर्शक नहीं रह सकती”

तेल अवीव (इज़राइल)। इज़राइल-ईरान संघर्ष के बीच भारत में इज़राइल के पूर्व राजदूत Daniel Carmon ने बड़ा बयान दिया है। तेल अवीव में मीडिया से बातचीत में उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत के बाद ईरान की सत्ता संरचना और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए।

“केवल खामेनेई नहीं, 3-5 अन्य नेता भी शामिल”

कारमोन ने कहा कि यह मामला सिर्फ खामेनेई तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षा और राजनीतिक प्रतिष्ठान के 3 से 5 अन्य शीर्ष नेताओं का भी मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरानी नेतृत्व ने Ahmad Vahidi को नामित किया है, जिन्हें उन्होंने “पिछले 30 वर्षों में आतंकी गतिविधियों से जुड़ा” बताया।
कारमोन के मुताबिक, वही व्यक्ति Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का नेतृत्व कर सकता है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

“वैश्विक सप्लाई चेन पर असर स्थायी नहीं”

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर उन्होंने कहा कि दुनिया इन घटनाक्रमों पर उदासीन नहीं रह सकती। हालांकि उनका मानना है कि यह स्थिति स्थायी नहीं है।
उन्होंने कहा, “जब यह शासन बदलेगा और उसकी जगह शांतिपूर्ण व्यवस्था आएगी, तब पश्चिम एशिया के बेहतर दिन लौटेंगे।”

भारत की भूमिका पर क्या बोले?

इज़राइल-ईरान संघर्ष में भारत की संभावित भूमिका पर पूछे जाने पर कारमोन ने स्पष्ट कहा, “मुझे यकीन है कि भारत की इसमें कोई भूमिका नहीं है।”

क्षेत्रीय परिदृश्य

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर चिंतित है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति की दिशा इस संकट को तय करेगी।


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