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# दीपावली पर मुस्लिम महिलाओं ने उतारी प्रभु श्रीराम की आरती, दिया सामाजिक समरसता का संदेश

‘जब-जब राम आएंगे, हम उनकी आरती उतारेंगे’ के जयघोष से गूंजा सुभाष भवन**

**समाज जागरण | रंजीत तिवारी**

**वाराणसी।** आध्यात्मिक नगरी काशी में दीपावली का पर्व भारतीय संस्कृति, आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता के अनूठे संदेश के साथ मनाया गया। लमही स्थित सुभाष भवन में मुस्लिम महिलाओं ने पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ प्रभु श्रीराम की आरती उतारी तथा दीप प्रज्ज्वलित कर दीपावली का त्योहार मनाया। इस आयोजन के माध्यम से महिलाओं ने देश की सांस्कृतिक एकता, अखंडता और आपसी सद्भाव का संदेश दिया।



दीपावली के अवसर पर आयोजित श्रीराम महाआरती में बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं शामिल हुईं। महिलाओं ने सजी हुई आरती की थालियों में दीप जलाकर भगवान श्रीराम और माता सीता की आरती की। इस दौरान उन्होंने प्रभु श्रीराम को मानवता, शांति और भारतीय जीवन-मूल्यों का प्रतीक बताते हुए कहा कि त्योहार किसी एक धर्म तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे देश की साझा सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का हिस्सा हैं।

इस अवसर पर महिलाओं ने एक स्वर में कहा, **’जब-जब राम आएंगे, हम उनकी आरती उतारेंगे।’** उनके इस भावपूर्ण संदेश ने आयोजन को विशेष बना दिया।

नेशनल सदर मुस्लिम महिला फाउंडेशन की सदस्य नाजनीन अंसारी ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी दीपावली के पावन अवसर पर मुस्लिम महिलाओं ने प्रभु श्रीराम की आरती संपन्न की। उन्होंने कहा कि वाराणसी में मुस्लिम महिलाओं द्वारा श्रीराम की आरती करने की यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है। यह पहल समाज में प्रेम, भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत करने के साथ भारतीय संस्कृति की एकता और अखंडता का संदेश देती है।

कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं ने यह संदेश दिया कि आपसी सम्मान, सद्भाव और साझा सांस्कृतिक परंपराएं ही देश की असली ताकत हैं।


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