- मिर्जापुर जिला अंतर्गत अहरौरा थाना क्षेत्र स्थित जंगल महाल गांव में है बेचूबीर बाबा की चौरी जहां लगता है भूतों का मेला
- बेचूबीर बाबा के चौरी का स्पर्श करने से प्रेत- बाधा से मिलती है मुक्ति, निःसंतान महिलाओं को होती है पुत्र की प्राप्ति
- 18 नवंबर से 20 नवंबर तक लगेगी मेला
- प्रदेश के पर्यटन मानचित्र में बेचूबीर बाबा मेला का नाम हो अंकित: रोशनलाल यादव
समाज जागरण/ ब्यूरो चीफ विजय कुमार अग्रहरी
सोनभद्र/ मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिला अंतर्गत अहरौरा थाना क्षेत्र में जरगो नदी तट पर बसे जंगल महाल गांव में बेचूबीर बाबा की चौरी पर प्रतिवर्ष लगता है तीन दिवसीय भूतों का मेला। लाखों की संख्या में निःसंतान महिलाओं का जरगो नदी में स्नान करने को जमावड़ा लगता है। बेचूबीर बाबा की चौरी का स्पर्श करते ही भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है, वहीं निःसंतान महिलाओं को पुत्र की प्राप्ति होती है। यह मेला पांच प्रांतों यूपी, एमपी, छत्तीसगढ़, झारखंड व बिहार के आस्था का केंद्र बिंदु है। हालांकि यहां पर देश भर से लोग आते हैं। अबकी बार 18 नवंबर से 20 नवंबर तक मेला लगेगी। बेचूबीर बाबा मेला का नाम प्रदेश के पर्यटन मानचित्र में अंकित होना चाहिए।
बेचूबीर बाबा का एक अद्भुत इतिहास है। भगवान शंकर के घोर उपासक बेचू यादव लगभग ढाई-तीन सौ वर्ष पूर्व से ही बेचूबीर बाबा के नाम से विख्यात हैं। बेचूबीर तीन दिन और तीन रात एक बाघ से लड़ते-लड़ते मृत्यु को प्राप्त हुए थे। बाघ की भी मौत हो गई थी। बेचूबीर की अंतिम इच्छा के अनुरूप उनके पुत्र रघुराई ने शरीर को समाधि दिया जो आज बेचूबीर बाबा की चौरी के रूप में विख्यात है। बेचूबीर जंगल में सारी रात गाय, भैंसों के साथ रहते थे, उनके साथ एक ब्राह्मण लड़का भी रहता था, बेचूबीर कभी-कभी रात्रि में जब सब चरवाहे सो जाते थे तब अचानक गायब हो जाते थे। 4 बजे भोर में हाथ में प्रसाद लिए हुए चरवाहों को यह कहते हुए प्रसाद खिलाते थे कि काशीविश्वनाथ का प्रसाद है अभी लेकर आया हूँ खा लो।
बेचूबीर बाबा की चौरी पर मेला व पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर एकादशी की सुबह तक चलता है। बेचूबीर की मुख्य पूजा दशमी की रात व एकादशी की प्रातः 3-4 बजे के बीच उनके वंशज ब्रजभूषण यादव द्वारा संपन्न की जाती है। अबकी बार 18 नवम्बर से 20 नवंबर तक मेला लगेगी।
बेचूबीर बाबा की चौरी का स्पर्श होते ही पीड़ितों को प्रेत-बाधा से मुक्ति मिल जाती है। नाउम्मीद महिलाओं की सुनी गोद भर जाती है। मुख्य पूजा में पीली और सफेद धोती, नारियल, खड़ाऊँ, मिठाई,फल, फूल, माला के साथ स्वेच्छया दक्षिणा चढ़ाई जाती है। मुख्य पूजा के दिन बकरा का कान काटकर चढ़ाया जाता है, लेकिन बलि नहीं दी जाती है। जो वस्त्र पहनकर जरगो नदी में स्नान किया जाता है उसे वहीं छोड़ दिया जाता है। मेला व्यवस्थापक रोशनलाल यादव का कहना है कि बेचूबीर बाबा की मेला का नाम उत्तर प्रदेश के पर्यटन मानचित्र में अंकित होना चाहिए।
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छठवें पीढ़ी के वंशज हैं तीन भाई
सोनभद्र। बेचूबीर बाबा के छठवें पीढ़ी के वंशज तीन भाई हैं जो पुजारी से लेकर व्यवस्थापक का कार्य देखते हैं। ये लोग सोनभद्र जिला अंतर्गत चोपन थाना क्षेत्र के मारकुंडी गांव में रहते हैं। वंशजों पर गौर करें तो बेचूबीर के लड़के रघुराई, रघुराई के लड़के शोभनाथ, शोभनाथ के लड़के बैजनाथ, बैजनाथ के लड़के लालता यादव पांचवीं पीढ़ी के वंशज रहे। अब छठवें पीढ़ी के वंशज लालता यादव के तीन लड़के संतलाल यादव,ब्रजभूषण यादव व रोशनलाल यादव शामिल हैं।
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महाराष्ट्र से शिवसेना के एक प्रमुख नेता के परिजन संतान के लिए आए थे यहां
सोनभद्र। बेचूबीर बाबा के वंशज रोशनलाल यादव एडवोकेट ने बताया कि करीब 15 वर्ष पूर्व महाराष्ट्र से शिवसेना के एक प्रमुख नेता के परिवार से ननद और भौजाई आई थी जिन्हें 7 साल से कोई संतान नहीं थी। यहां आने पर पुत्र की प्राप्ति हुई। इसी तरह कई आईपीएस/पीसीएस अधिकारी के परिवार की महिलाएं आई थी। यहां आने पर पुत्र की प्राप्ति हुई।
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19 नवंबर को समाज कल्याण राज्य मंत्री आएंगे बेचूबीर मेला
सोनभद्र। मेला के व्यवस्थापक रोशनलाल यादव एडवोकेट ने बताया कि प्रदेश के समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव सिंह गोड़ ने सीएम, डीएम व एसपी मिर्जापुर को पत्रक देकर मेला की सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए मांग किया है। 19 नवंबर की शाम मंत्री जी मुख्य पूजा कार्यक्रम में शामिल होंगे।
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