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कबूतरों को दाना डालना मौत को दावत देने के बराबर।

मनुष्य के फेफड़ों के लिए घातक बीट में पाए जाने वाले बैक्टीरिया ।

सत्य प्रकाश नारायण सहायक विधि संवाददाता / धनंजय कुमार विधि संवाददाता बिहार झारखंड प्रदेश

पुण्य की लालसा में कबूतरों को दाना डालने की प्रवृत्ति प्राकृतिक असंतुलन को जन्म दे रही है। जिसके चलते मनुष्य में जानलेवा बीमारियों का कारण भी बन रही है। पक्षी विज्ञानी और वन विभाग के लोगों से जगह-जगह दाना न डालने की अपील किया जा रहा है, जो लोग घरों की छतों पर या चौराहे पर पक्षियों को दाना डालते हैं उन लोगों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया सांसो की माध्यम से फेफड़ों तक पहुंच जाता है। इससे सीटीकोशिश नाम का संक्रमण हो जाता है। इससे संक्रमित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। महाराष्ट्र में ठाणे नगर निगम ने तो इससे के पोस्टर भी लगा दिए हैं कि जो कबूतरों को दाना डालते हुए पकड़े जाएंगे उस पर ₹500 का जुर्माना लगाया जाएगा। बीट में पाए जाने वाले बैक्टीरिया कबूतर जहां-तहां बीट करते हैं बीट कलामाडिया सिटीकाई नामक बैक्टीरिया होता है जो सांसो के माध्यम से फेफड़ों में पहुंच जाता है ।लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज मेरठ के छाती और टीवी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर संतोष मित्तल ने बताया कि एक जानलेवा बीमारी है। इसलिए पुण्य कमाने के चक्कर में कबूतरों और पक्षियों को दाना डालना बंद कीजिए और सुरक्षित रहीए। पुण्य कमाने के चक्कर में कहीं आप मौत को दावत तो नहीं दे रहे हैं।


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