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भूजल दोहन से पर्यावरण पर संकट! खदान से रोजाना लाखों लीटर पानी की निकासी, ग्रामीणों में बढ़ी चिंता

समाज जागरण/ ब्यूरो चीफ, विजय कुमार अग्रहरी

सोनभद्र। एक तरफ प्रदेश सरकार भीषण गर्मी को देखते हुए जल संरक्षण और भूजल बचाने के लिए लगातार अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र स्थित श्री राम एसोसिएट पर बड़े पैमाने पर भूजल दोहन के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि खदान में जमा पानी को मशीनों और पाइपों के जरिए रोजाना लाखों लीटर की मात्रा में बाहर निकालकर सीधे नाले में जा रहा वो नाला अटल भूजल योजना या किसी अन्य जल संचयन से तो कटई नहीं जुड़ा है। इस वजह से लाखों लीटर पानी आसपास के क्षेत्र का बर्बाद हो जा रहा, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर प्रभावित होने लगी है।

जानकारों के अनुसार खदान में जलभराव होने पर बड़े स्तर की ब्लास्टिंग, पोकलेन मशीनों के संचालन और खनन कार्य में तकनीकी दिक्कतें आती हैं। यही कारण है कि खदान संचालक उत्पादन और मुनाफे को बनाए रखने के लिए लगातार पानी की निकासी कर रहे हैं। हालांकि पर्यावरणविदों का कहना है कि करोड़ों के मुनाफे के लिए मानव जीवन, वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों को खतरे में नहीं डाला जा सकता।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि प्रचंड गर्मी के कारण क्षेत्र के कई हैंडपंप, कुएं और बोरिंग प्रभावित हो चुके हैं। कई लोगों को पानी की तलाश में रिबोरिंग तक करानी पड़ी है जिससे 125/130 रूपये फिट के हिसाब से 25/30 हज़ार तक का अतरिक्त खर्चा वहन करने को मजबूर हो जाते है, लेकिन गर्मी के मौसम में जल संकट की समस्या बरकरार है। ऐसे में खदानों से लगातार पानी निकाले जाने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि खदानों में जमा पानी स्थानीय जल संतुलन का हिस्सा होता है। यदि बड़े पैमाने पर इसकी निकासी की जाती है तो भूजल पुनर्भरण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे भविष्य में क्षेत्र पेयजल संकट और गंभीर रूप ले सकता है। नियमों के अनुसार खनन क्षेत्रों में जल प्रबंधन और भूजल संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो पर्याप्त वृक्षारोपण किया जा रहा है और न ही जल संरक्षण के लिए कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है।

सूत्रों के अनुसार संबंधित खदान में कई अन्य अनियमितताओं के भी आरोप हैं। दावा किया जा रहा है कि खनन परमिटों का दुरुपयोग किया जा रहा है तथा निर्धारित मानकों से अधिक ब्लास्टिंग की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अत्यधिक ब्लास्टिंग और जल स्रोतों के क्षरण से चट्टानों के दरकने का खतरा भी बढ़ गया है।

गौरतलब है कि बिल्ली मारकुण्डी खनन क्षेत्र में पूर्व में ब्लास्टिंग के लिए ड्रिलिंग के दौरान खदान का एक बड़ा हिस्सा मजदूरों पर गिर गया था, जिसमें कई श्रमिकों की मौत हो गई थी। घटना के बाद खतरनाक खदानों में सुधारात्मक कार्य कराए जाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय मिलीभगत से नियमों का पालन सिर्फ कागचों तक सिमित रह गया है।

क्षेत्रीय नागरिकों ने खदान से हो रही पानी की निकासी, पर्यावरणीय प्रभावों और सुरक्षा मानकों की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में जल संकट के साथ-साथ किसी बड़े हादसे की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।


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