करीमुद्दीनपुर की रामलीला में कुम्भकर्ण वध का हुआ भव्य मंचन, कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को तालियां बजाने पर किया मजबूर
विकास राय, ब्यूरो चीफ गाजीपुर
समाज जागरण
गाजीपुर। जनपद की प्राचीनतम रामलीला समितियों में शामिल रामलीला समिति करीमुद्दीनपुर की ओर से कान्ति कला के भव्य मंच पर कुम्भकर्ण वध प्रसंग का शानदार मंचन किया गया। रामलीला के दौरान रावण-कुम्भकर्ण संवाद, कुम्भकर्ण-विभीषण संवाद और लक्ष्मण-मेघनाद प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कलाकारों के सजीव अभिनय और प्रभावशाली संवाद अदायगी पर दर्शक लगातार तालियां बजाते रहे।
मंचन के दौरान लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध और लक्ष्मण शक्ति प्रसंग का विशेष रूप से प्रभावशाली चित्रण किया गया। राम की भूमिका निभा रहे जयप्रकाश राय ने लक्ष्मण शक्ति लगने के बाद का करुण दृश्य प्रस्तुत कर दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके बाद हनुमान-कालनेमि और हनुमान-भरत संवाद का मंचन हुआ। लंका से लाए गए सुषेण वैद्य द्वारा संजीवनी बूटी दिए जाने के बाद लक्ष्मण के पुनर्जीवित होने का दृश्य भी आकर्षण का केंद्र रहा।
कुम्भकर्ण ने रावण को दी कुल विनाश की चेतावनी
लक्ष्मण के स्वस्थ होने का समाचार मिलते ही लंका में रावण ने कुम्भकर्ण को जगाने का आदेश दिया। दरबारियों ने तरह-तरह के प्रयासों के बाद कुम्भकर्ण को जगाया। भोजन और मदिरा के बाद जब उसे रावण का संदेश सुनाया गया तो वह दरबार में पहुंचा और लंकेश को प्रणाम कर असमय जगाए जाने का कारण पूछा।

रावण से पूरी घटना जानने के बाद कुम्भकर्ण ने उसे पितामह ब्रह्मा की बातों की याद दिलाई और सीता हरण को अनुचित बताते हुए रावण को समझाने का प्रयास किया। हालांकि, रावण अपने निर्णय पर अडिग रहा।
अंततः कुम्भकर्ण ने भाई के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए युद्ध में जाने का निर्णय लिया। रावण को गले लगाकर उसने कहा कि यदि वह शाम तक राम-लक्ष्मण के सिरों को गेंद की तरह पैरों से ठोकर मारता हुआ युद्धभूमि से वापस नहीं लौटता है तो रावण माता जानकी को श्रीराम के पास लौटा दे, ताकि उसका संपूर्ण कुल विनाश से बच सके।
कुम्भकर्ण-विभीषण संवाद ने नम की दर्शकों की आंखें
कुम्भकर्ण और हनुमान के बीच संवाद तथा युद्ध के दृश्यों ने दर्शकों में विशेष उत्साह पैदा किया। वहीं कुम्भकर्ण और विभीषण के बीच हुए भावनात्मक संवाद ने उपस्थित लोगों की आंखें नम कर दीं। कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
कुम्भकर्ण की भूमिका में डॉ. दिनेश चन्द्र राय, रावण की भूमिका में उमेश चन्द्र राय, विभीषण की भूमिका में जितेंद्र राय तथा हनुमान की भूमिका में विनय राय ने शानदार अभिनय किया।
इस अवसर पर राजेश राय पूर्व प्रधान प्रतिनिधि, श्रीमती ममता राय पूर्व प्रधान करीमुद्दीनपुर, निर्देशक ओंकारनाथ राय, डॉ. दिनेश चन्द्र राय, व्यवस्थापक सुनील कुमार राय, डॉ. रामानन्द तिवारी, अश्वनी राय, जयप्रकाश राय, जितेन्द्र नाथ राय, उमेश चन्द्र राय, डॉ. सुभाष ठाकुर, अखिलेश चौरसिया, राजकुमार पाण्डेय, हरेराम यादव, महेश्वर पाण्डेय सहित रामलीला के सभी पात्र, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
Discover more from समाज जागरण
Subscribe to get the latest posts sent to your email.



