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किशनगंज में मौत का कारोबार: कब टूटेगा अवैध नर्सिंग होम का नेटवर्क?

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
किशनगंज जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर खुलेआम मौत का कारोबार चल रहा है। अवैध, गैर-पंजीकृत और बिना योग्य डॉक्टरों के संचालित निजी क्लिनिक व नर्सिंग होम हर गली-चौराहे पर किराना दुकान की तरह खुल चुके हैं। इन जगहों पर इलाज नहीं, बल्कि आम नागरिकों की ज़िंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है।


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हर महीने दर्जनों नहीं बल्कि सैकड़ों मरीज इन अवैध नर्सिंग होम में दम तोड़ रहे हैं, फिर भी स्वास्थ्य विभाग आंख मूंदे बैठा है। कार्रवाई के नाम पर कभी नोटिस, कभी जांच की बात—लेकिन ज़मीनी हकीकत में सब कुछ जस का तस बना हुआ है।


सीमांचल सेवा फाउंडेशन (पंजीकृत संस्था) द्वारा जिलाधिकारी और सिविल सर्जन किशनगंज को बार-बार लिखित शिकायतें दी गईं, तथ्यों और सबूतों के साथ चेताया गया, बावजूद इसके आज तक एक भी बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई। सवाल उठता है—क्या इन अवैध नर्सिंग होम को किसी का संरक्षण प्राप्त है?
इसी कड़ी में हाल ही में किशनगंज शहर से सटे फरिंगोला नेशनल हाईवे स्थित फातिमा हेल्थ केयर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसने पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। वायरल वीडियो में एक निजी एम्बुलेंस चालक/ड्राइवर असलम को अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर के अंदर मरीज को टांके लगाते हुए साफ देखा जा सकता है।


सोचने वाली बात यह है कि जब एक एम्बुलेंस चालक ऑपरेशन थिएटर में सर्जन की भूमिका निभा रहा हो, तो वहां मरीज की जान की कीमत आखिर क्या होगी? यह महज़ लापरवाही नहीं, बल्कि सीधा आपराधिक कृत्य है।
इसके बावजूद अब तक स्वास्थ्य विभाग ने न तो अस्पताल को सील किया, न ही पंजीकरण रद्द किया और न ही कोई आधिकारिक बयान जारी किया। दैनिक जागरण में प्रकाशित खबरों के अनुसार, इसी अस्पताल की लापरवाही के चलते पहले भी कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।


सीमांचल सेवा फाउंडेशन के संस्थापक हसीबुर रहमान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि इस मामले में अविलंब कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि स्वास्थ्य विभाग भी इस अवैध व्यवस्था का मौन भागीदार है। उन्होंने मांग की है कि फातिमा हेल्थ केयर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल का पंजीकरण तत्काल रद्द किया जाए, अस्पताल को सील किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों व संचालकों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।


अब सवाल यह नहीं रह गया है कि कार्रवाई होगी या नहीं—
सवाल यह है कि किशनगंज के लोग कब तक इलाज के नाम पर मौत खरीदने को मजबूर रहेंगे?
और क्या स्वास्थ्य विभाग तब जागेगा, जब अगली लाश किसी अपने की होगी?


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