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कोबरा के जहर को मात देकर घर लौटी नन्ही नैन्सी, 102 एंबुलेंस ने बचाई जान

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
25 जून। समय पर मिली चिकित्सा सुविधा, 102 एंबुलेंस कर्मियों की तत्परता और चिकित्सकों के अथक प्रयास से सर्पदंश की शिकार एक मासूम बच्ची की जान बच गई। तीन दिनों तक चले उपचार के बाद बच्ची पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट आई।
जानकारी के अनुसार बहादुरगंज प्रखंड के कटेलबाड़ी गांव निवासी नैन्सी प्रवीण को 20 जून को खेलते समय जहरीले कोबरा सांप ने काट लिया। कुछ ही देर में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। परिजन उसे तत्काल बहादुरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए सदर अस्पताल, किशनगंज रेफर कर दिया गया।


सूचना मिलते ही 102 एंबुलेंस के चालक संदीप कुमार और ईएमटी देवराज कुमार मौके पर पहुंचे। दोनों ने बिना समय गंवाए बच्ची को एंबुलेंस में शिफ्ट किया और सदर अस्पताल के लिए रवाना हो गए। रास्ते भर ईएमटी ने बच्ची की स्थिति पर नजर रखते हुए आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई, जबकि चालक ने कुशलतापूर्वक वाहन चलाकर उसे समय पर अस्पताल पहुंचाया।


सदर अस्पताल में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने लगातार तीन दिनों तक बच्ची का गहन उपचार किया। इलाज और निगरानी के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ तथा वह पूरी तरह स्वस्थ होकर खतरे से बाहर आ गई।
बेटी के स्वस्थ होने पर उसके पिता सेदर रहमान ने सदर अस्पताल पहुंचकर 102 एंबुलेंस के चालक संदीप कुमार और ईएमटी देवराज कुमार को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि समय पर एंबुलेंस और चिकित्सा सहायता नहीं मिलती तो उनकी बेटी को बचाना मुश्किल हो सकता था।


जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जिले के अंतिम व्यक्ति तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। वहीं सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि सर्पदंश जैसी आपात स्थितियों में मरीज को शीघ्र अस्पताल पहुंचाना जीवन बचाने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है।


जिले में वर्तमान में 34 एंबुलेंस संचालित हैं, जिनमें 8 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट, 24 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस तथा 2 शव वाहन शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 102 एंबुलेंस सेवा प्रतिदिन 62 से अधिक मरीजों को आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रही है।


नैन्सी की यह कहानी समय पर स्वास्थ्य सेवा, एंबुलेंस कर्मियों की तत्परता और चिकित्सकों के समर्पण से जीती गई जिंदगी की जंग का प्रेरक उदाहरण बन गई है।


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