Us फेड पाॅलिसी से पहले बाजार नर्वस है। बाजार ऊपसी स्तरों से फिसला है। निफ्टी बैंक भी 44000 के नीचे फिसला है। लेकिन मिडकैप संभलने की कोशिस मे है औऱ चीन मे ब्याज दरें घटने से मेटल शेयरों में मजबूती देखने को मिल रही है। निफ्टी इंडैक्स करीब दो परसेंट ऊपर कारोबार कर रहा रहा है। SAIL , टाटा स्टील, JSW स्टील मे डेढ़ से तीन परसेंट का उछाल है।
- समाज जागरण: 13 सितम्बर दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित दैनिक हिंदी समाचार पत्र, देशभर में पहुंच रही आवाजनई दिल्ली। बदलते दौर में जब समाचारों की दुनिया तेजी से डिजिटल हो रही है, वहीं ‘समाज जागरण’ अपनी जमीनी पत्रकारिता और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता के साथ पाठकों तक पहुंचा रहा है। दैनिक हिंदी समाचार पत्र ‘समाज जागरण’ का प्रकाशन दिल्ली-एनसीआर से होता है और इसका प्रसार देश के विभिन्न हिंदी भाषी राज्यों तक है। समाज जागरण में देश-दुनिया, राजनीति, अपराध, शिक्षा, रोजगार, व्यापार, स्वास्थ्य,…
- वाराणसी: सीवर लाइन में मिलीं बालू से भरी बोरियां, प्राथमिकी की तहरीरशिवाला, नगवा समेत आधा दर्जन वार्डों में सीवर लाइनों के भीतर बालू, पत्थर और लकड़ी का बुरादा मिलने से हड़कंप वाराणसी, 12 सितंबर। वाराणसी के शिवाला, सरायनंदन, नगवा समेत करीब आधा दर्जन वार्डों में सीवर लाइनों की सफाई के दौरान बालू से भरी बोरियां, पत्थर, लकड़ी का बुरादा, प्लाई और प्लास्टिक सामग्री मिलने का मामला…
- ब्रिक्स की ‘गूंज’ वाशिंगटन से इस्लामाबाद तक खलबलीअजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकारलखनऊ ( उ. प्र.) नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मंच पर जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साथ कैमरे के सामने आए, तो वाशिंगटन से लेकर पश्चिमी राजधानियों तक भू-राजनीतिक हलचल तेज होना लाजिमी…
- हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी : आस्था, प्रेम और मंगलकामना का पावन संगमभाद्रपद की पावन बेला में शिव-पार्वती की आराधना और गणपति वंदना का पर्व – सुरेश सिंह बैस”शाश्वत” भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि वे जीवन-मूल्यों, पारिवारिक संबंधों, प्रकृति और सामाजिक सद्भाव को अपने भीतर समेटे होते हैं। भाद्रपद मास इसी दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। वर्षा ऋतु…
- जय हिंदी बोलते हैं, जी अंग्रेजी करते हैं, हिंदी को हमने मंच दिया, मगर मौका नहींकृति आरके जैन हिंदी से हमारा रिश्ता भी बड़ा अजीब है—साल में एक दिन प्रेम उमड़ता है और बाकी दिन सुविधा जीत जाती है। 14 सितंबर को वही हिंदी सम्मान पाती है, जिसे 364 दिन सुविधा, करियर और प्रतिष्ठा के लिए पीछे कर दिया जाता है। दफ्तरों में अधिकारी हिंदी की महिमा गाते हैं, अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के अभिभावक बच्चों से हिंदी…
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