*नई दिल्ली:** सामाजिक कार्यकर्ता **हिमांशु कुमार** ने आज **प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया, दिल्ली** में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने **नोएडा में हाल ही हुए मज़दूरों के प्रदर्शन** के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद की पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए।

हिमांशु कुमार ने आरोप लगाया कि **यूपी पुलिस की जाँच प्रक्रिया कई विरोधाभासों से भरी हुई है**, और यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि हिंसा को रोकने के बजाय पुलिस की भूमिका कहीं न कहीं **स्थिति को भड़काने** वाली तो नहीं रही। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी मज़दूर अपनी बुनियादी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद हालात अचानक बिगड़े।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह भी मांग की कि—
* पुलिस की कार्रवाई की **स्वतंत्र न्यायिक जाँच** करवाई जाए।
* प्रदर्शन में शामिल मजदूरों पर लगाए गए मामलों की **पुनर्समीक्षा** की जाए।
* और जाँच रिपोर्ट को **सार्वजनिक** किया जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
हिमांशु कुमार ने कहा कि लोकतंत्र में पुलिस का काम लोगों की आवाज़ दबाना नहीं, बल्कि **उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना** है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि पारदर्शिता नहीं रखी गई, तो ऐसे घटनाक्रम जनता के भरोसे को और कमजोर करेंगे।



