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महारानी दुर्गावती का 502 वा जन्मदिन धूमधाम से मनी

समाज जागरण अनिल कुमार
हरहुआ वाराणसी।
आज सोमवार को जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, गनेशपुर वार्ड नं -14, शिवपुर, वाराणसी के आदिवासी लोक कवि कन्हैया लाल गोंड सभागार में गोंड वीरांगना महारानी दुर्गावती जी का 502 वां जन्म दिवस मनाया गया l सर्वप्रथम दुर्गावती जी के मूर्ति पर माल्यार्पण और दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम सुभारम्भ किया गया।


कार्यक्रम में संस्थान के सचिव/प्रवंधक – डॉ. बृजभान मरावी ने संस्थान के जनजाति हस्तशिल्प कारीगरों को महारानी दुर्गावती के जीवन कृति के बारे में अपने आदिवासी कलाकारों को बताया की वीरांगना महारानी दुर्गावती गोंडवाना साम्राज्य के महाराजा दलपत शाह की पत्नी थी, जो मध्य भारत के गढ़-मंडला (गोंडवाना) राज्य के महाप्रतापी राजा थे।


महारानी दुर्गावती महाराज दलपत शाह के आकस्मिक मृत्यु के बाद उन्होंने अपने पुत्र वीर नारायण को गद्दी पर बैठाते हुए स्वयं प्रशासनिक नेतृत्व कर मुगलों को तीन युद्ध में मुँह तोड़ जवाब दिया। 1564 में मुगलों से लड़ते हुए नरई नाला युद्ध में धोखे से आंख में तीर लग जाने के कारण घायल हो गईं और अपने आप को मुगलो की गुलामी न करना हो, जिसके लिए स्वयं अपने सीने में कटार मार कर सदैव के लिए वीरांगना हो गईं l इस वलिदान से गोंडवाना के महानता को पूरे मध्य भारत में इतिहास स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराया। महारानी दुर्गावती मध्य भारत की इतिहास में एक ऐसी गोंडवाना महारानी रही जिन्होंने अपने जमीर को गुलाम नहीं होने दिया था।


उक्त अवसर पर संस्थान के शिल्प कलाकार विनोद कुमार गोंड, बलिराम गोंड, बाबूलाल पटेल शिवकुमार, जीतेन्द्र, बबलू, तेगा पूजा, मनकेशरा देवी आदि लोग उपस्थित रहे।


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