दैनिक समाज जागरण अनील कुमार संवाददाता नबीनगर (औरंगाबाद)
नबीनगर (बिहार) नबीनगर नगर पंचायत द्वारा बुधवार को चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अतिक्रमण के नाम पर सिर्फ गरीबों की गुमटी, ठेला और फुटपाथ पर बने करकट के आशियाने उजाड़ दिए गए, जबकि रसूखदारों के पक्के अतिक्रमण को छोड़ दिया गया। जानकारी के अनुसार नगर पंचायत ने अतिक्रमण के विरुद्ध 50 फिट जगह चिह्नित कर दागी लगाया गया था।कई लोगों को नोटिस जारी कर जगह खाली करने का निर्देश दिया था। स्थानीय लोगों का दावा है कि सड़क किनारे वास्तविक अतिक्रमण 70 से 80 फिट तक है।लेकिन बुधवार को हुई कार्रवाई में बुलडोजर मात्र 20 फीट के दायरे में ही चलाया गया। प्रभावित लोगों ने बताया कि फुटपाथ पर करकट डालकर, गुमटी और ठेला लगाकर गरीब परिवार अपनी जीविका चलाते थे। प्रशासन ने बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए उनके आशियाने तोड़ दिए।
इससे दर्जनों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों और प्रभावित दुकानदारों ने प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाया। लोगों का कहना है कि वार्ड पार्षदों और पहुंच वाले लोगों के दबाव में चुनिंदा जगहों पर ही कार्रवाई की गई। कई रसूखदारों के पक्के निर्माण और दुकानें सड़क पर अतिक्रमण कर बनी हैं, लेकिन उन्हें हाथ तक नहीं लगाया गया। इस मामले में नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि सदर एसडीओ के आदेश पर अतिक्रमण हटाया गया है। पहले चरण में सड़क पर यातायात बाधित करने वाले अस्थायी अतिक्रमण को हटाया गया है। बाकी जगहों पर भी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि जन प्रतिनिधियों की दबाव की बात स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि पूरा अतिक्रमण चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।भेदभाव के आरोपों को उन्होंने गलत बताया। इस दौरान नबीनगर मुख्य सड़क पर दिनभर अफरा-तफरी का माहौल रहा।
Discover more from समाज जागरण
Subscribe to get the latest posts sent to your email.



