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‘अर्णब’ तूफान की बारिश से धान की फसल को भारी नुकसान, किसानों को लाखों की चपत

ओबरा और चोपन क्षेत्र में तेज हवाओं से खेतों में गिरी धान की फसल, कटी फसल भी बारिश में भीगी; किसानों ने सर्वे कराकर मुआवजे की मांग की

समाज जागरण/मनोज कुमार चौबे

सोनभद्र। चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ के प्रभाव से हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। ओबरा तहसील क्षेत्र के सुंदरिया, बर्दिया, खैरटिया, चौरा और बिजौरा सहित आसपास के गांवों में धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल तेज हवाओं के कारण जमीन पर गिर गई है, जबकि कटाई के बाद खेतों में रखी फसल बारिश के पानी में भीगकर खराब हो रही है। किसानों ने लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताते हुए प्रशासन से तत्काल सर्वे और मुआवजे की मांग की है।

ग्राम सिंदुरिया निवासी पूर्व प्रधान एवं किसान रामनारायण पांडेय ने बताया कि उन्होंने करीब 20 बीघा खेत में धान की खेती की थी। बेमौसम बारिश और तेज हवाओं के कारण उनकी लगभग 75 प्रतिशत फसल जमीन पर गिरकर बर्बाद हो गई है। वहीं, तीन से चार दिन पहले काटकर खेतों में रखी गई धान की फसल भी बारिश में भीग गई। उन्होंने अपनी खेती में करीब तीन लाख रुपये के नुकसान का अनुमान जताया। उनके मुताबिक गांव के 15 से 20 अन्य किसानों की फसल भी इसी तरह प्रभावित हुई है।

चोपन क्षेत्र में भी किसानों की बढ़ी चिंता

विकासखंड चोपन क्षेत्र के एक किसान ने बताया कि लगातार बारिश के कारण खेतों में कटी हुई धान की फसल भीगकर खराब हो गई है, जबकि तेज हवाओं से खड़ी फसल जमीन पर गिर गई है। किसान के अनुसार, उन्होंने करीब 18 बीघा खेत में धान की खेती की थी, जिसमें ढाई से तीन लाख रुपये तक के नुकसान का अनुमान है। उन्होंने दावा किया कि उनके क्षेत्र के लगभग 99 प्रतिशत किसानों की धान की फसल प्रभावित हुई है।

किसानों ने प्रशासन से लगाई मदद की गुहार

किसानों का कहना है कि यदि मौसम का यही रुख बना रहा और दोबारा तेज बारिश हुई तो खेतों में बची हुई फसल को भी भारी नुकसान हो सकता है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।

किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से प्रभावित गांवों में तत्काल फसल नुकसान का सर्वे कराने, पात्र किसानों को फसल बीमा का लाभ दिलाने तथा उचित सरकारी मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है। अब किसानों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।


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