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सोनभद्र: ‘पेड़ हैं तो प्राण हैं’ अभियान के तहत आदिवासी परिवारों को बांटे गए फलदार पौधे

समाज जागरण | आदिवासी सुनील त्रिपाठी
कोन (सोनभद्र), 30 जुलाई। सोनभद्र के कोन विकासखंड अंतर्गत तरिया क्षेत्र के खलटंगवा गांव में ‘पेड़ हैं तो प्राण हैं’ जनआंदोलन के तहत आदिवासी परिवारों के बीच फलदार पौधों का वितरण किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा और आदिवासी समाज की भागीदारी पर विशेष बल दिया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्र ने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से जंगलों और प्रकृति की रक्षा करता आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े कॉरपोरेट हितों के कारण जंगलों पर दबाव बढ़ रहा है और इसे लेकर आदिवासी समाज को संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष आदिवासी समाज की पहचान और अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

तरिया क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता लक्षमन वादी ने कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी समुदाय की विरासत हैं और इनकी रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर जंगलों का अंधाधुंध दोहन नहीं होने दिया जाएगा।

ग्रामीण कन्हैया चेरो ने कहा कि यह केवल जल-जंगल-जमीन का मुद्दा नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की अस्मिता से जुड़ा विषय है। वहीं रामसूरत सिंह खरवार ने कहा कि किसी भी परिवार को विस्थापित नहीं होने दिया जाएगा और इसके लिए ग्रामीण एकजुट होकर संघर्ष करेंगे।

कार्यक्रम में योगेंद्र, राघवेंद्र, सीताराम गोंड, दिनेश चेरो, बाबा बैगा, बासमती, रन्‍नो, विंदू खरवार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं आदिवासी समुदाय के लोग उपस्थित रहे।

नोट: कार्यक्रम में वक्ताओं द्वारा केंद्र सरकार एवं कॉरपोरेट कंपनियों को लेकर लगाए गए आरोप उनके व्यक्तिगत राजनीतिक वक्तव्य हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।


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