मगध विश्वविद्यालय के अंतर्गत सभी सरकारी महाविद्यालयों और प्राइवेट कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों को है परीक्षा का इंतजार
फ़ोटो _ मगध विश्वविद्यालय का मुख्य द्वार
वारिसलीगंज (नवादा) (अभय कुमार रंजन):-मगध की चर्चा ज्ञान और तप की भूमि के रूप में सदियों से होती रही है। जहां देश विदेश के कईयों ने शिक्षा प्राप्त कर पूरी दुनिया में ज्ञान की लौ जलाई है।लेकिन आज उस ज्ञान की भूमि पर स्थापित मगध विश्वविद्यालय देश-विदेश तो दूर की बात मगध वासियों को बिना पढ़ाई भी डिग्री देने में भी सक्षम नहीं हो रही है। यही कारण है कि बिहार सहित देश में इन दिनों नौकरी की बहार है। लेकिन तीन वर्षीय डिग्री के लिए लगभग पांच वर्ष पूरा कर चुके मगध विश्वविद्यालय में पढ़ रहे विद्यार्थियों को अभी भी परीक्षा का इंतजार है। बता दें मगध विश्वविद्यालय कुछ वर्ष पहले तक बिहार का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय हुआ करता था। जिसके सभी कॉलेज लगभग तीन दशक पहले तक उच्च शिक्षा प्राप्त करने का प्रमुख केंद्र था। जिसमें लगभग चार दर्जन सरकारी मान्यता प्राप्त कॉलेज था जिसमें बिहार की राजधानी पटना के कई नामी कॉलेज भी शामिल था। लेकिन प्रशासकीय सहूलियत को देखते हुए पटना, नालंदा के कॉलेजों को मगध विश्वविद्यालय से हटाकर पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में शामिल कर दिया गया।
अब मगध विश्वविद्यालय का मुख्य द्वार मगध विश्वविद्यालय में कुल 20 सरकारी मान्यता प्राप्त तो 27 संबद्धता प्राप्त डिग्री कॉलेज स्थापित है। जहां कुछ कॉलेज को छोड़कर लगभग सभी कॉलेजों में पिछले 20 से 30 वर्षों से पढ़ाई पूरी तरह बंद है। कुछ दिन पहले तक बिना पढ़ाई डिग्री दी जा रही थी। लेकिन इधर हाल के वर्षों में विश्वविद्यालय प्रशासन के अनियमितता में संलिप्त
होने और बिहार सरकार व राज भवन के अनदेखी कारण इन विश्वविद्यालय के कॉलेजों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को डिग्री मिलना भी मुश्किल हो रहा है।
सामाजिक, आर्थिक दबाव झेल रहे हैं अभिभावक विद्यार्थी
पिछले कुछ वर्षों से विश्वविद्यालय व राजभवन के क्रियाकलाप के चलते विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों में नामांकित छात्र छात्राओ का भविष्य अंधकारमय हो गया है। खासकर वैसे मध्यवर्गीय विद्यार्थी जो इन कॉलेजों में नामांकन करा कर दूर जाकर प्रतियोगी मगध विश्वविद्यालय के महाविद्यालयों में नामांकित छात्र छात्राओं सहित अभिभावकों को सामाजिक व
आर्थिक दवाब झेलनी पड़ रही है। 2018 में एसएन सिन्हा महाविद्यालय में नामांकन करा चुके शिवम मनीष अखिलेश की उम्र 23 और 24, 25 वर्ष हो चुका है। बावजूद मात्र पार्ट 2 का परीक्षा दिया है। जिसका परीक्षा परिणाम अभी भी आना बाकी है। जिस कारण किसी प्रकार की तैयारी करना मुश्किल हो रहा है। इन जैसे हजारों छात्रों के साथ साथ अभिभावकों को आर्थिक और सामाजिक यातनाएं झेलनी पड़ रही है। उसी प्रकार छात्राओं की स्थिति और भी विकट है। जिसकी शादी 20 से 25 वर्ष की उम्र तक सामान्यता कर दी जाती है। लेकिन 25 वर्ष होने को है और कोई नौकरी या रोजगार तो दूर की बात स्नातक की पढ़ाई भी पूरी नहीं हो सकी है। जिस कारण इन बेटियों के पिता को अपनी आकांक्षा को दबाकर बिना स्नातक हुए ही शादी करने को विवश होना पड़ रहा है।
छात्र- छात्राओ का भविष्य अंधकारमय
पिछले कुछ वर्षों से विश्वविद्यालय व राजभवन के क्रियाकलाप के चलते विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले कॉलेज में नामांकित छात्र छात्राएं का भविष्य अंधकार में हो गया है खासकर भाई से मध्यम वर्गीय विद्यार्थियों को इन कॉलेजों में नामांकन करा कर दूर जाकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में जुटे हुए हैं। और तैयारी पूरी हो चुकी है। लेकिन विश्वविद्यालय का सत्र काफी लेट होने के कारण डिग्री नहीं मिली है। जिस कारण देश में आयोजित कोई भी प्रतियोगी परीक्षा नहीं दे सकते हैं। डिग्री कब मिलेगी और प्रतियोगी परीक्षाओं में कब शामिल होंगे अनिश्चय की स्थिति विद्यार्थियों के सामने बनी हुई है। खासकर अभी जब बिहार सहित पूरे देश में हर रोज नौकरी की वैकेंसी निकल रही है। इन विद्यार्थियों को भरी मानसिक यातनाएं झेलनी पड़ रही है। साथ ही देश में आयोजित कई परीक्षाये जिसकी उम्र सीमा होती है।
३ वर्ष की डिग्री 4 और पांच वर्ष में भी नही हुई हैं पूरी
इन 47 डिग्री कॉलेजों में हजारों की संख्या में 2018 से 21 और 2019 से 22 के सत्र में विद्यार्थी नामांकित हैं। जिनका लगभग पांच और चार वर्ष पूरा हो चुका है। 18 में नामांकन लिए विद्यार्थी का पार्ट 2 का परीक्षा संपन्न हो गया है। जबकि 19 में नामांकित विद्यार्थी पार्ट वन की परीक्षा दे चुके हैं। लेकिन लगभग साल भर बाद भी परीक्षा परिणाम प्रकाशित नहीं हो सका है। जबकि विश्वविद्यालय के नियमानुसार किसी भी विद्यार्थी का रजिस्ट्रेशन पांच वर्ष तक ही मान्य होता है। कुछ माह बाद इन विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन अमान्य हो जाएगा। उसी प्रकार सत्र 20 से 23, 21 से 24 जिन का नामांकन दो वर्ष पहले महाविद्यालय में हो चुका है। जिसका रजिस्ट्रेशन होना है। तीन वर्षीय स्नातक डिग्री के लिए कब परीक्षा परिणाम आएगा और तृतीय वर्ष में नामांकन होकर डिग्री प्राप्त होगी को लेकर इन विद्यार्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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