समाज जागरण
प्रकृति के सबसे बुद्धिजीवी प्राणियोंं में से एक मानव आज पुन: साबित करने में लगा है कि हम उन हिंसक जानवरों से अलग नही है। जो अपने भूख मिटाने के लिए दूसरे प्राणी की हत्या करते है। बल्कि हम उनसे भी ज्यादा हिंसक हो चले है जो अपने काम रूपी वासना को मिटाने के लिए अपने ही प्रजाति के प्राणियों से रेप जैसी कुकर्म करते है।
मामला कन्नौज की है जहाँ पर 24 अक्टूबर को एक तरफ जहाँ लोग दिवाली की तैयारी में लगे थे वही दूसरी तरफ मानव के खाल में छुपे भेड़िये एक मासूम जिंदगी को रौंद रहा था। दिवाली के सामान लेने बाजार गयी 13 साल की मासूम लापता हो गयी। बाजार मिट्टी के गुल्लक लेने गयी लेकिन क्या पता था कि इंसान के खाल में भेड़िया घात लगाये बैठा होगा। घंटो तक पता नही चला उसके बाद किसी नें बताया कि गेस्ट हाउस के पीछे खुन से लथपथ पड़ी है।
आनन फानन में पुलिस को सूचना दी गई पुलिस ने मौके पर पहुँचकर स्वयं से उस मासूम को एक एक आटो रिक्शा में ले जाकर अस्पताल में भर्ती करवाया जहाँ मासूम जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही है। आने वाले एक एक पल उसके लिए महत्वपूर्ण है। वही दूसरी तरफ पुलिस नें जाँच शुरु कर दी है ।
अब सवाल उठता है कि क्या समाज मे मानसिक दिवालियापन अपने चरम सीमा पर है? बाबा बुल्डोजर के नाम से प्रचलित योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में भी आखिर मानव के खाल में भेड़ियों का उचित ईलाज क्यो नही किया जा रहा है। हाल ही में बलिया में एक मासूम जो कि मेला देखने गयी लेकिन लौटी नही, जब परिजनों नें ढुढना शुरु किया तो खुन से लथ-पथ एक खेल में मिली। वाराणसी हास्पिटल में भर्ती कराया गया, कई दिनों के ईलाज के बाद भी बलिया के बेटी हार गई औऱ इस निर्दय दुनिया को अलविदा कहकर चली गयी । लेकिन इस समाज के लिए कई प्रश्न चिन्ह लगाकर गयी। सरकार पर प्रश्न चिन्ह लगा गई। यह कन्नौज की 13 साल की मासूम सरकार औ समाज से यही सवाल पूछ रही है क्या इस समाज में मातृ शक्ति सुरक्षित है या फिर दरिंद ऐसे ही उसके आबरू को रौंदते रहेंगे और सरकार बेटी बचाओ बेटी पढाओं की होर्डिंग लगवाती रहेगी।
एक सवाल तो आपसे भी है कही ऐसे घटना के पीछे आपके मानसिकता भी जिम्मेदार तो नही है ? जरा एक बार अपने मन को टटोलिये और फिर विडियों के नीचे कमेंट बाक्स में जरुर लिखिये।
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