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आराध्या बच्चन केस: क्या बच्चन परिवार की प्रतिष्ठा अगली पीढ़ियों तक भी कानूनी सुरक्षा पा सकती है?

दिल्ली हाई कोर्ट ने उठाए अहम सवाल

नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता अभिषेक बच्चन और अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन की बेटी आराध्या बच्चन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रतिष्ठा, फेक न्यूज और बौद्धिक संपदा अधिकारों को लेकर कई महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उठाए हैं। मामला आराध्या की सेहत और निजी जीवन को लेकर ऑनलाइन प्रसारित किए गए कथित भ्रामक और झूठे कंटेंट से जुड़ा है।

गुरुवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने इस बात पर विचार किया कि किसी प्रसिद्ध परिवार के नाम से जुड़ी प्रतिष्ठा को कानूनी संरक्षण किस सीमा तक दिया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी परिवार की वर्षों में बनी प्रतिष्ठा आगे की पीढ़ियों तक कानूनी रूप से प्रभावी हो सकती है।

क्या परिवार की प्रतिष्ठा अगली पीढ़ी तक जा सकती है?

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस पहलू पर विचार किया कि किसी प्रसिद्ध परिवार के सरनेम को उसकी उपलब्धियों और सार्वजनिक पहचान के कारण किस हद तक कानूनी सुरक्षा मिल सकती है। सवाल यह भी सामने आया कि क्या किसी परिवार के नाम की प्रतिष्ठा को ट्रेडमार्क जैसी अवधारणा से जोड़कर देखा जा सकता है और यह संरक्षण कितनी पीढ़ियों तक जारी रह सकता है।

इस संदर्भ में बच्चन परिवार का नाम भी चर्चा में आया। कोर्ट यह समझना चाहता है कि एक पीढ़ी द्वारा बनाई गई प्रतिष्ठा का कानूनी प्रभाव परिवार की अगली पीढ़ी के सदस्यों पर किस सीमा तक लागू हो सकता है।

क्या फेक न्यूज भी आईपी अधिकारों का उल्लंघन हो सकती है?

सुनवाई के दौरान फर्जी या भ्रामक खबरों को लेकर भी अहम सवाल उठाया गया। कोर्ट ने विचार किया कि यदि किसी व्यक्ति के बारे में झूठी जानकारी प्रकाशित की जाती है और उससे उसकी प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचता है, तो क्या इसे बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघन के दायरे में रखा जा सकता है।

इसके साथ ही कोर्ट ने मानहानि और बौद्धिक संपदा अधिकारों के बीच संभावित संबंध को लेकर भी सवाल किया। हालांकि, कोर्ट द्वारा सुनवाई के दौरान उठाए गए सवालों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

आराध्या की ओर से क्या दलील दी गई?

आराध्या बच्चन की ओर से पेश अधिवक्ता प्रवीण आनंद ने दलील दी कि मामला सिर्फ एक व्यक्ति की प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, बच्चन परिवार के नाम और तस्वीरों का कथित तौर पर आराध्या की सेहत को लेकर झूठे दावों के साथ इस्तेमाल किया जा रहा था।

वकील ने ‘पासिंग ऑफ’ कानून का भी उल्लेख किया। तर्क दिया गया कि बच्चन नाम और परिवार की तस्वीरों के साथ एक नाबालिग बच्ची की सेहत को लेकर गलत जानकारी प्रसारित किए जाने से ऐसी भ्रामक छवि बन सकती है, जिससे परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।

2023 में शुरू हुई थी कानूनी लड़ाई

आराध्या बच्चन से जुड़ी यह कानूनी लड़ाई वर्ष 2023 में शुरू हुई थी। उनके पिता अभिषेक बच्चन के माध्यम से दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें आराध्या की सेहत और निजी जीवन को लेकर ऑनलाइन प्रसारित किए जा रहे कथित झूठे कंटेंट पर आपत्ति जताई गई थी।

बताया गया कि कई यूट्यूब वीडियो में आराध्या की मेडिकल कंडीशन को लेकर गलत दावे किए गए थे। अप्रैल 2023 में दिल्ली हाई कोर्ट ने आराध्या को अंतरिम राहत देते हुए कई यूट्यूब चैनलों को उनकी सेहत या शारीरिक स्थिति से संबंधित कंटेंट प्रकाशित या साझा करने से रोक दिया था। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से संबंधित सामग्री हटाने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे।

सितंबर में फिर होगी सुनवाई

फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है। कोर्ट द्वारा उठाए गए सवालों के आधार पर प्रतिष्ठा, मानहानि, पर्सनैलिटी राइट्स, बौद्धिक संपदा अधिकार और ‘पासिंग ऑफ’ जैसे कानूनी पहलुओं पर आगे बहस हो सकती है। मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होने की संभावना है।

समाज जागरण डेस्क


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