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टाटा स्टील लीज नवीनीकरण से पहले 18 मौजा के मूल रैयतों का सर्वे हो : झारखंड मूलवासी अधिकार मंच

दैनिक समाज जागरण 14.07.2026 चांद कुमार लायेक (ब्यूरो चीफ) पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुरड

जमशेदपुर झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मंच के मुख्य संयोजक हरमोहन महतो के नेतृत्व में कोल्हान आयुक्त रवि रंजन विक्रम से मुलाकात कर टाटा स्टील के प्रस्तावित लीज नवीनीकरण से पूर्व जमशेदपुर के 18 मौजा क्षेत्र के मूल रैयतों, आदिवासियों और टाटा विस्थापित परिवारों का व्यापक सर्वेक्षण कराने तथा उन्हें न्याय दिलाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में आयुक्त को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए भूमि अधिकार, विस्थापन और पुनर्वास से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

मंच ने ज्ञापन में कहा कि टाटा स्टील के लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले उन सभी मूल रैयत परिवारों और विस्थापितों के अधिकारों एवं दावों का निष्पक्ष समाधान किया जाना आवश्यक है, जिनकी जमीनों पर उद्योग, आवासीय क्षेत्र अथवा अन्य परियोजनाएं विकसित की गई हैं। मंच का कहना है कि दशकों से कई परिवार अपने भूमि अधिकारों और पुनर्वास से जुड़े मामलों में न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि वर्ष 1908 और 1937 के खतियान को भूमि स्वामित्व निर्धारण का आधार माना जाए तथा वर्ष 1996 के खतियान को निरस्त किया जाए। मंच का आरोप है कि बाद के वर्षों में तैयार किए गए रिकॉर्ड के कारण कई मूल रैयत परिवारों के अधिकार प्रभावित हुए हैं। इसके साथ ही बिना लीज, बिना वैधानिक अधिग्रहण अथवा बिना स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया के कब्जे में ली गई भूमि की पहचान कर उसे मूल रैयतों को वापस करने की मांग भी की गई।

ज्ञापन में कहा गया है कि जमशेदपुर के 18 मौजा क्षेत्रों का विस्तृत और पारदर्शी सर्वे कराया जाए, ताकि वास्तविक भूमि धारकों और प्रभावित परिवारों की पहचान सुनिश्चित हो सके। मंच ने वर्ष 2005 में हुए लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया की पुनः समीक्षा करने की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि उस समय हुए कई निर्णयों और प्रक्रियाओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

झारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने अवैध कब्जों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने तथा ग्रामसभा की लिखित सहमति के बिना किसी भी भूमि संबंधी निर्णय पर रोक लगाने की मांग की है। मंच का कहना है कि संविधान और पंचायत विस्तार अधिनियम की भावना के अनुरूप स्थानीय समुदायों की सहमति के बिना भूमि से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लिए जाने चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की कि टाटा विस्थापितों और मूल रैयतों को लीज नवीनीकरण प्रक्रिया में प्रतिनिधित्व दिया जाए, ताकि उनकी बात सीधे तौर पर संबंधित अधिकारियों और निर्णय लेने वाली संस्थाओं तक पहुंच सके। इसके अलावा भूमि उपयोग, लीज की शर्तों और राजस्व रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

मंच ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, रोजगार, स्वरोजगार और आजीविका की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। इसके लिए जिला स्तर पर एक निगरानी समिति गठित करने तथा प्रभावित रैयतों को विस्थापित प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की मांग की गई है, जिससे वे सरकारी योजनाओं और पुनर्वास संबंधी सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

ज्ञापन में वर्ष 1909, 1912 और 1929 में हुए समझौतों के साथ-साथ 20 अगस्त 2005 के लीज नवीनीकरण से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की गई है। मंच का कहना है कि इन सभी मामलों की समीक्षा कर मूल रैयत खतियानधारियों को न्याय दिलाना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।

मुख्य संयोजक हरमोहन महतो ने आयुक्त से आग्रह किया कि भू-राजस्व विभाग को आवश्यक प्रस्ताव भेजकर टाटा विस्थापितों और मूल रैयतों का सर्वे कराया जाए तथा किसी भी लीज नवीनीकरण प्रक्रिया से पहले उनके अधिकारों और दावों का निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित किया जाए।

ज्ञापन सौंपने के दौरान हरमोहन महतो के अलावा प्रहलाद गोप, सानंद प्रधान, मनोज बोदरा और अभिषेक प्रधान सहित मंच के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।


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