समाज जागरण/आदिवासी सुनील त्रिपाठी
चोपन/सोनभद्र। विकास कार्यों को लेकर नगर पंचायत चोपन में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी कार्यप्रणाली और निविदा प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर पंचायत की ओर से 24 सितंबर 2026 को करीब 77.47 लाख रुपये की अनुमानित लागत वाले नौ विकास कार्यों के लिए अल्पकालीन निविदा जारी की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इनमें शामिल करीब सात कार्य निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही धरातल पर कराए जा चुके थे। यदि आरोप सही है तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 9 अक्टूबर निर्धारित थी, तब उससे पहले ही संबंधित कार्य कैसे पूरे हो गए?
शिकायत के साथ कार्यस्थल के फोटो और वीडियो उपलब्ध कराए जाने का दावा भी किया गया है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग करते हुए सवाल उठाया है कि यदि संबंधित कार्य पहले ही करा दिए गए थे तो बाद में उन्हीं कार्यों को निविदा में शामिल करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
24 सितंबर को जारी हुई थी निविदा
नगर पंचायत चोपन की ओर से पंचम राज्य वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि से विकास कार्य कराने के लिए 24 सितंबर को अल्पकालीन निविदा सूचना जारी की गई थी। इसमें कुल नौ कार्य शामिल किए गए, जिनकी अनुमानित लागत 77.47 लाख रुपये बताई गई है।
निविदा सूचना के मुताबिक दस्तावेज प्राप्त करने की अंतिम तिथि 8 अक्टूबर और निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 9 अक्टूबर निर्धारित की गई है। इसी दिन शाम चार बजे जिला मुख्यालय स्थित जिलाधिकारी कार्यालय सोनभद्र में निविदाएं खोले जाने की बात कही गई है।
निविदा में शामिल प्रमुख कार्यों में स्टोर रूम, वाहन शेड, रंगीन इंटरलॉकिंग, नाली एवं सीसी निर्माण, आरसीसी नाली, इंटरलॉकिंग एवं नाली तथा सीसी रोड निर्माण शामिल हैं।
सात कार्य पहले ही कराए जाने का आरोप
शिकायतकर्ता का दावा है कि निविदा में शामिल नौ में से करीब सात कार्य निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही धरातल पर करा दिए गए थे। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब कार्यों के लिए अभी निविदाएं आमंत्रित की जा रही थीं, तब निर्माण कार्य किस आधार पर शुरू अथवा पूर्ण कराए गए।
मामले में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या संबंधित कार्यों के लिए पहले से कोई प्रशासनिक या तकनीकी अनुमति थी? यदि थी तो उसकी जानकारी निविदा सूचना में किस प्रकार दर्ज की गई? और यदि अनुमति नहीं थी तो निविदा से पहले कार्य कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
ईओ बोले- त्रुटिवश कुछ कार्य निविदा में शामिल हो गए
मामले को लेकर नगर पंचायत चोपन के अधिशासी अधिकारी अखिलेश सिंह ने कहा कि निविदा में कुछ कार्य त्रुटिवश शामिल हो गए थे। मामला सामने आने के बाद संबंधित कार्य को निरस्त किए जाने की बात भी उन्होंने कही। ईओ के अनुसार, निरस्तीकरण के संबंध में बाकायदा विज्ञप्ति जारी कर इसकी जानकारी दी गई है।
हालांकि, निविदा जारी होने से पहले संबंधित कार्य कराए जाने के आरोपों तथा इस पूरी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे अन्य सवालों पर ईओ ने विस्तृत मौखिक जवाब देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मामले की पूरी जानकारी लिखित रूप से विभाग के उच्च अधिकारियों को दी जाएगी। ईओ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस संबंध में पत्रकारों को बयान देने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
एक गलती से लाखों के नुकसान की आशंका, भरपाई कौन करेगा?
मामले में सबसे अहम सवाल अब सरकारी धन के संभावित नुकसान को लेकर उठ रहा है। यदि किसी कार्य को पहले ही करा दिया गया था और बाद में उसे निविदा में शामिल कर दिया गया, अथवा प्रक्रिया में त्रुटि के कारण निविदा जारी करनी पड़ी और फिर उसे निरस्त करना पड़ा, तो इस पूरी प्रक्रिया में हुए खर्च और संभावित वित्तीय नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी?
यदि निविदा प्रकाशन, दस्तावेज तैयार करने और अन्य औपचारिकताओं में सरकारी धन खर्च हुआ है, तो क्या महज ‘त्रुटिवश’ हुई गलती मानकर मामला समाप्त हो जाएगा या संबंधित अधिकारी/कर्मचारी की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी? यह जांच का विषय है।
सवाल यह भी है कि यदि विज्ञप्ति में दर्ज कार्यों में वास्तव में ऐसी त्रुटि थी, तो निविदा जारी होने से पहले उसका परीक्षण किस स्तर पर किया गया था। आखिर निविदा जारी करने से पहले कार्यों की सूची, लागत और मौके की स्थिति का सत्यापन किस अधिकारी ने किया?
जांच से ही सामने आएगी वास्तविक तस्वीर
फिलहाल नगर पंचायत की ओर से कुछ कार्यों को त्रुटिवश निविदा में शामिल किए जाने और बाद में निरस्त किए जाने की बात कही गई है। दूसरी ओर शिकायतकर्ता ने निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही कई कार्य कराए जाने का आरोप लगाया है।
ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी हो गई है। जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि बिना निर्धारित प्रक्रिया के कार्य किसके निर्देश पर कराए गए, इसकी अनुमति किस स्तर से मिली और सरकारी धन पर पड़े किसी अतिरिक्त भार की जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
फिलहाल मामला एक ही सवाल के इर्द-गिर्द घूम रहा है—पहले काम हुआ या पहले टेंडर? और यदि पूरी प्रक्रिया में सरकारी धन का नुकसान हुआ है तो उसकी भरपाई कौन करेगा?
इन सवालों का जवाब अब नगर पंचायत की विभागीय रिपोर्ट और उच्च अधिकारियों की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।
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